219 6.5.1945 हमें जातीय बहुमत नहीं, राजनीतिक बहुमत चाहिए - मुंबई - Page 463

442 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अब हम उन दो सवालों के बारे में सोचें जिनका मैंने पहले जिक्र किया है। पहले प्रश्न के संदर्भ में वहां के हालात कैसे हैं? प्रश्न का उत्तर देने से पहले प्रांतीय विधिमंडल के सदस्यत्व के जाति के आधार पर होने वाले विभाजन के जानकारी होना जरूरी है। निम्नांकित कोष्क इस बारे में जानकारी देता है-

प्रांतीय विधिमंडल में सीटों का जाति आधारित विभाजन जनजातियां सामान्य महिला यूनिवर्सिटी ट्रेड यूनियन व्यापार जमींदार जोड़ 1 2 3 4 5 6 7 8 हिंदू 651 26 7 33 31 22 770 मुसलमान 482 10 1 5 6 13 597 अस्पृश्य समाज 151 - - - - - 151 भारतीय ईसाई 20 1 - - - - 21 एंग्लो इंडियन 11 1 - - - - 12 सिक्ख 34 1 - - - 1 36 यूरोपीयन 26 - - - 19 1 46 आदिवासी 24 24

कुल 1399 39 88 38 56 37 1577

क्रिप्स योजना में जिसका नामोनिशान भी नहीं उस जाति आधारित सीटों के बंटवारे की व्यवस्था जिसे सप्रू योजना में स्थान दिया गया है का क्या महत्व है? इसका जवाब इस सवाल के जवाब पर निर्भर करता है कि किसी भी समुदाय को अपने उम्मीदवार को जिताने के लिए दूसरे समुदाय पर किस हद तक निर्भर करना पड़ेगा! इस बारे में क्या फायदे होंगे? एक और कोष्क देखिए-

सीटों के बारे में मतदान शक्ति

जनजाति संविधान समिति संविधान समिति परिमाण चुनाव $से अधिक मतदाता

के लिए मतदाता में सीटों का के लिए आवश्यक -से कम मतदाता

अनुपात मतसंख्या

1 2 3 4 5

  1. हिंदू 778 51 561 $217