27
102
* अनुशासन और संगठन अपने पक्ष के लक्ष्य हैं
20 जुलाई, 1937 को पुणे के अहिल्याश्रम में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में पृथक मजदूर पक्ष के मुंबई प्रांतिक एसेंब्ली के सदस्यों की पहली सभा हुई।
काऊंसिल के कामकाज संबंधी कुछ नियम पारित करने के बाद स्वतंत्र लेबर पक्ष के नेता के रूप में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपनी पार्टी के कड़े अनुशासन और संगठन का अहसास कराया। उन्होंने बताया कि नैतिक बल के सहारे काम करने वाले हर पक्ष को अनुशासन और संगठन इन दो बातों की ओर ध्यान देना होगा। जो काम हम लेते हैं उसमें शुरू-षुरू में भले असफलता मिले, हमें अपने लक्ष्य से कभी मुंह नहीं फेरना चाहिए। इंसान के पास जितना अधिक नैतिक बल होगा उतना उसका आत्मविश्वास बढ़ता जाएगा और आखिर हार से भी वह ससम्मान सफलता पा सकता है। इंग्लैंड के विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के इतिहास पर अगर हम नजर डालते हैं तो पता चलता है कि अनुशासन और संगठन का वहां भी मेल किया गया है। इंग्लैंड में किसी जमाने में बेहद छोटा रहा मजदूर पक्ष भी अनुशासन और संगठन के बल पर आखिर सत्ता में आया यह हमने देखा। और हमने यह भी देखा कि पुराना अनुशासन और संगठन में थोड़ी ढील आते ही वह पक्ष कैसे सत्ता से दूर हुआ।
दुनिया के राजनीतिक घटनाक्रम में सफलता हासिल करना कोई आसान काम नहीं है। उसके लिए मानों तपश्चर्या ही करनी पड़ती है। पक्ष को बलवान बनाने के लिए पहले पक्ष की कमजोरियां क्या हैं इस पर गौर करना पड़ता है। राजनीतिक पार्टियों में केवल अमीरों या अपने प्रिय व्यक्तियों को शामिल करने से काम नहीं चलता। विभिन्न विषयों का अध्ययन कर चुके और विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों को ही अपनी पार्टी में जिम्मेदारी की जगहों पर नियुक्त कर पार्टी की दिशा तय करनी होती है। भावपूर्ण और प्रभावी भाषा का इस्तेमाल करते हुए जनता को गुमराह कर सत्ता में आने वाले बड़े पक्ष की तुलना में अनुशासन, संगठन तथा उज्जवल उद्देश्य का अहसास होने वाले अल्पसंख्यक लोगों की छोटी पार्टी ही आखिर राजनीतिक क्षेत्र में प्रभाव डालते हुए सफल होता है। हमारी स्वतंत्र लेबर पार्टी आज देखने में छोटी है लेकिन हमने जिस उद्देश्यपूर्ण कार्य। की उज्जवल रूपरेखा बनाई है उसमें आगे चल कर हमें अभूतपूर्व सफलता ही मिलने वाली है।
* जनताः 31 जुलाई, 1937