219 6.5.1945 हमें जातीय बहुमत नहीं, राजनीतिक बहुमत चाहिए - मुंबई - Page 485

464 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दरकिनार नहीं किया जा सकता है। उन्हें ठिकाने पहुंचाने का एएक ही सही रास्ता है और वह है अल्पसंख्यकों के बीच उन्हें बांटना। पहली बात से संपादक अगर सहमत है तो उसका साफ मतलब यह निकलता हैं। कि मुसलमानों की 50 प्रतिशत की मांग का वह समर्थन करते हैं। लेकिन अगर वह पहली नहीं बल्कि दूसरी बात से सहमति दर्शाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप अस्पृश्यों को मिलने वाले प्रतिनिधित्व से मुसलमानों को अधिक प्रतिनिधित्व प्राप्त हुआ तो यह नहीं कहा जा सकेगा कि मेरी योजना में अस्पृश्यों को ‘इद्रपद’ दिलाने का प्रबंध जानबूझ कर किया गया है। युक्तियुक्त योजना के अनुसार सीटों का बंटवारा किए जाने के कारण अस्पृश्यों को अगर उनका न्यायपूर्ण हिस्सा मिल रहा हो तो मेरी समझ में नहीं आता कि कोई भी निष्पक्ष व्यक्ति इस पर आपत्ति कैसे कर सकता है? अपनी योजना में मैंने सीटों का जो बंटवारा किया है वह केवल सापेक्ष बहुमत और युक्तियुक्त बंटवारे के सामान्य नियमों पर आधारित है।

आपका

बी.आर. अम्बेडकर

मुंबई 15-5-1945 *

डॉ. अम्बेडकर की योजना की श्री ए. बी. ठक्कर बनाम ठक्कर बाप्पा द्वारा

की गई समीक्षा

हिंदुस्तान की जातीय समस्या का समाधान सुझाते हुए कुछ बातें सामने रखी हैं। उनका आग्रह है कि किसी तरह की हिचकिचाहट के बिना वे सभी बातें सभी जातियों पर लागू की जाएं और वे यह दावा भी कर रहे हैं कि उनकी बनाई योजना सबके लिए योग्य है। लेकिन विधिमंडल में, अधिकारी वर्ग में तथा नौकरियों में प्रतिनिधित्व देने के बारे में डॉ. अम्बेडकर, ने जिन जातियों को चुना है ब्रिटिश सरकार द्वारा जिन्हें 1935 के कानून के तहत मान्यता प्रदान की है, उन आदिवासी जनजातियों को यानी भिन्न आदि जातियों को शामिल नहीं किया है।

दलितों और पिछड़ों के इस मसीहा ने अस्पष्ष्यों से बुरी हालत में जीने वाले जंगली लोगों को नजरंदाज कर दिया है यह देख कर अचरज लगता है। इतना ही नहीं, इन लोगों को जो दिया गया था वह भी सब उनसे इन्होंने छीन लिया। वाह रे मसीहा! सभी समुदायों के लिए बना हिचक के लागू करने के लिए जो तत्व उन्हों सबके सामने रखे हैं उनमें से एक में डॉ. अम्बेडकर कहते हैं कि सभी जातियों का सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक स्थितियों को ध्यान में लेते हुए उसके विपरीत अनुपात में उन जातियों को

* जिस तारख को यह लेख टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित हुआ वह तारीख और डॉ. बाबासाहेब

अम्बेडकर द्वारा दी गई प्रतिक्रिया की तारीख युक्तियुक्त नहीं लगती। इसी कारण जनता के अंक में दी

गई तारीख में गलती हुई होगी-संपादक