220 14.5.1945 अस्पृश्य समाज की अपनी सबसे सुन्दर और उपयुक्त इमारत बने - परेल (मुंबई) - Page 488

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* अस्पृश्य समाज की अपनी सबसे सुंदर और उपयुक्त इमारत बने

शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेषन मुंबई शहर शाखा थी ओर से सोमवार, दिनांक 14 मई, 1945 को शाम छह बजे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को दामोदर हॉल के पीछे वाले बगीचे में चाय-पार्टी का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर सभी बार्डों के सदस्य, केंद्रीय समिति और डॉ. बाबासाहेब का ग्रुप फोटो लिया गया। चायपान के बाद डॉ. बाबासाहेब से बोलने की विनती की गई। उस वक्त तालियों की गड़गड़ाहट में डॉ. बाबासाहेब बोलने के लिएखड़े हुए। उन्होंने कहा,

आज के इस अवसर पर दो शब्द बोलने की मुझसे विनति की गई है। इसीलिए, दो शब्द बोलना मुझे उचित लगता है।

सबने मेहनत से इस परिषद को सफल बनाया इसके लिए मैं आपका अभिनंदन करता हूं।

आज की इस बड़ी परिषद का सब दूर बोलबाला हुआ है। हमारे दुष्मन सभी अखबारों ने परिषद के सफल रहने कीखूब प्रशंसा की है। इस परिषद के बहाने आपने जो एकजुटता दिखाई है वह प्रशंसा योग्य है। अलबत्ता ऐसा न समझें कि काम अब पूरा हुआ है और अब हम आराम से घर बैठ सकते हैं।

हमें एक बड़ा काम करना है। आप सब जानते हैं कि हमें एक बड़ा हॉल बनाना है। सैंतीस हजार रुपएखर्च कर हमने उसके लिए जगहखरीदी है। युद्ध के कारण हम अभी इसे बनाने का काम षुरू नहीं कर पा रहे हैं लेकिन युद्ध समाप्ति के बाद यह काम शुरू किया जाएगा। युद्ध समाप्त होने ही वाला है। सो कह सकते हैं कि छह महीनों के बाद काम की शुरूआत हो जाएगी। हॉल बनाने के लिए करीब दो लाख रुपयों की जरूरत पड़गी यह मैंने पहले ही आपसे कहा है। हम जो हॉल बनाने वाले हैं वह इतना सुंदर होना चाहिए कि उसके जैसा हॉल मुंबई में ढूंढ कर भी न मिले। अगर कोई प्रतिषप्राप्त मेहमान आए और वह मुंबई के सभी हॉल देखने की सोचें और अगर उनके बारे में उन्हें अपनी राय व्यक्त करनी हो तो उसे कहना पड़े कि सबसे बढि़या और श्रेष्ठ हॉल अस्पृश्यों का ही है। इस हॉल के बनने में आपका ही पैसा लगेगा यह बात बल्कि आप जरूर ध्यान में रखें। अपना हॉल अगर हमखुद बनाएंगे तभी हमारी इज्जत होगी।

* जनताः 19 मई, 1945