468 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
इस मामले में, जैसा कि पहले ही बताया गया है, अठारह साल से बड़ी उम्र के हर व्यक्ति को एक रूपया देना है। आज तक इकट्ठा की गई रकम बैंक में रखी गई है और उसका हिसाब श्री शा. अ. उपशाम के पास है।
परिषद के काम के लिए वार्ड कमेटियों के जो संगठन बने हैं उनके जरिए अगर यह चंदा इकट्ठा किया जाए तो काम आसान होगा। हमारे जो गरीब भाई हैं उन पर निर्भर रह कर जरूरत का सारा पैसा इकट्ठा होगा, इसका मुझे भरोसा नहीं है। इसलिए जिनके लिए संभव हो वे कम से कम पच्चीस रुपए इस काम के लिए दें। इमारत का काम पूरा होने के बाद मैं इतिहास लिखने वाला हूं। इस इतिहास की पुस्तक में पच्चीस रुपयों का चंदा देने वाला की तस्वीर छपेगी। यह अमूल्य मौका है ऐसा मैं समझता हूं।
वार्ड के लोग अपने वार्ड से 25 रुपए देने वाले लोगों को चुनें और उनसे तय रकम हासिल करें।
अधिवेशन के लिए जिस तरीके से इकट्ठा किए गए थे उसी तरह ये चंदा भी इकट्ठा किया जाए।
आज मुझे जो कुछ बताना था वह मैंने बता दिया। आखिर, एक बार फिर आपका अभिनंदन कर मैं आपसे विदा लेता हूं।
डॉ. बाबासाहेब के भाषण के बाद मडकेबुवा द्वारा धन्यवाद अर्पण किया गया और समारोह संपन्न हुआ।