222 4.10.1945 अपनी उन्नति की खातिर हमें देश को मिलने वाली सत्ता में शामिल होना चाहिए - पुणे - Page 496

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समिति की नियोजित योजना को व²कग कमेटी का इन कारणों से तीव्र विरोध है-

(1) नियुक्त की गई संविधान समिति के आगे निर्णय के लिए आने वाले मसलों को सही तरीके से हल करने के लिए उस विषय के बारे का पूर्वानुभव हो, इन मसलों पर जो पूरे अधिकार के साथ बोल और सोच पाएं ऐसे बिल्कुल लायक उम्मीदवारों को ही संविधान समिति के लिए चुने जाने का भरोसा न दिलाएं जाने के कारण कह सकते हैं कि, ऐसी संविधान समिति केवल भावनाओं सेखेल ही साबित होगी।

(2) पूंजीपतियों से संविधान समिति के सदस्यों को रुपयों की घूस देकर अपनी तरफ कर लेने का और इस प्रकार उनके मतों केखरीद-फरोरण्त के षड्यंत्र रचे जाने का बहुत बड़ा धोखा इसमें निहित है।

(3) संविधान समिति अनावश्यक और निरूपयोगी है। क्योंकि संविधानात्मक मतभेदों के मुद्दों पर निर्णय लेते हुए जब वे मुद्दे निश्चित दायरे में ही घूमते रहने वाले हों तो संविधान समिति जैसी भारी भरकम व्यवस्था का रोडा क्यों अटकाया जाए? वह बिल्कुल वेमतलब होगा। महत्वपूर्ण मुद्दों के निर्णयों को लेकर हिंदी लोगों में हमेशा मतभेद होते रहते हैं। अधिकतर मतभेदों के मुद्दों का स्वरूप जातीय होता है। इस कारण जातीय मसलों पर निर्णय लेने की जिम्मदारी कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय संविधान समिति के बहुसंख्यकों के दल को सौंपने के लिए कभी राजी नहीं होंगे। इसीलिए संविधान समिति बिल्कुल अनुपयोगी है।

चौथा प्रस्तावः

प्रांतीय विधिमंडल का संविधान समिति से संबंध

ऑ.इं.शे.का.फे. की व²कग कमेटी की निश्चित राय है कि संविधान समिति के निर्माण के साथ प्रांतीय विधिमंडल के चुनावों का तालुक को जोड़ने की कोषिष करना अंग्रेज सरकार की सबसे बड़ी गलती है। इस बारे में गहराई से सोच-विचार के बाद यह व²कग कमेटी निर्णय लेती है कि निम्नांकित कारणों से प्रांतीय विधिमंडल से चुने गए प्रतिनिधियों द्वारा बनाई गई संविधान समिति असली संविधान समिति का काम करने के लिए पूरी तरह से नालायक होगी।

कारणः

(1) प्रांतीय विधिमंडल में मतदान का अधिकार संपत्ति आधारित योग्यता पर निर्भर करने के कारण शेडयूल्ड कास्टस् और बहुसंख्य श्रमिक इस अधिकार को पाने से वंचित रह गए हैं। इस प्रकार बहुसंख्य जनता को परे रखते हुए सिर्फ संपत्तिधारी मतदाताओं के मतों के आधार से चुने गए प्रांतीय विधिमंडल के जरिए बनाई गई संविधान समिति को राज्य का संविधान बनाने का नैतिक कोई अधिकार नहीं।