476 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
(2) आजादी या पाकिस्तान के नारों के सहारे अगर चुनाव लड़े गए तो ऐसे चुनाव जीत कर बनने वाले प्रांतीय विधिमंडल के जरिए बनाई जाने वाली संविधान समिति- राज्य संविधान के स्वरूप और उसके मुलभूत मुद्दों के बारे में अधिकारिक रूप से निर्णय ले पाएगी इसका कोई भरोसा नहीं। ऐसी संविधान समिति द्वारा बनाया गया संविधान कभी ‘लोगों द्वारा लोगों के लिए बनाया गया संविधान’ होना संभव ही नहीं इसीलिए उसे स्वीकार करना भी संभव ही नहीं।
(3) संयुक्त चुनाव क्षेत्र पद्धति से होने वाले चुनावों से निर्मित प्रांतीय विधिमंडल की ओर से बनाई जाने वाली संविधान समिति में, शेडयूल्ड कास्टस् तथा ऐसे ही अन्य समुदायों के असली और भरोसेमंद प्रतिनिधियों के आने की संभावना न होने के कारण इन संविधान समितियों पर उनको (शेडयूल्ड कास्टस् और तत्सम समुदायों को) भरोसा नहीं हो सकता। इसीलिए इस संविधान समिति के किसी भी निर्णय को मानना इन समुदायों के लिए नैतिक नजरिए से बंधनकारी नहीं हो सकता। प्रांतीय विधिमंडल के चुनावों से संविधान समिति का किसी तरह का संबंध न जोड़ा जाए इस बारे में जागरूक रहने की बेहद आवश्यकता है और संविधान समिति का चुनाव अच्छे तरीके से कराया जाए। संविधान समिति में हिस्सा लेने की इच्छा रखने वाले हर दल को चुनाव में उतरने से पहले भावी संविधान और जातीय न्याय के बारे में अपनी योजना को उजागर किए बगैर संविधान समिति के गठन का कोई मतलब नहीं होगा। इसीलिए हर दल पर इन बातों की घोषणा पहले ही किए जाने को लेकर सख्ती बरती जाए। व²कग कमेटी का चुनाव नहीं होगा चाहिए।
पांचवां प्रस्तावः
शे.का.फेडरेशन में शामिल होने के लिए सभी अस्पृश्यों के नाम आखिरी पुकार
ऑ.इं.से.का.फे. की व²कग कमेटी भारत के सभी अस्पृश्यों को चेतावनी देना चाहती है कि वे जाग जाएं और अपने न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ना है या अपना सर्वनाश कराना है इस बात पर ध्यान देते हुए हिंदुस्तान का हर अस्पृश्य शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन में शामिल हों। इस फेडरेशन को हिंदुस्तान के अस्पृश्यों की एक भेवा द्वितीय प्रातिनिधिक संस्था बनाएं। क्योंकि, अस्पृश्यों का भविष्य तय करने वाला भारतीय संविधान निर्माण के लिए जो संविधान समिति बनने वाली है उसमें केवल प्रांतीय विधिमंडलों से चुने गए सदस्यों को ही चुना जाने वाला है। इस कारण आगामी प्रांतीय चुनावों को हिंदुस्तान केखास कर अस्पृश्यों के इतिहास में ‘पृश्न भुतों न भविष्यति’ महत्व प्राप्त हुआ है। उक्त व²कग कमेटी जनता को जोखम के प्रति सावधानता की चेतावनी देते हुए सूचित करती है कि संविधानात्मक सुरक्षा की अस्पृश्यों की मांग का विरोध करने वाले राजनीतिक दल में स्वार्थ के लिए जो अस्पृश्य