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में अनुत्तीर्ण हुए बच्चे हैं। हम अनुत्तीर्ण बच्चे को नौकरी पर नहीं रखते। क्योंकि वह लायक नहीं होता। काँग्रेस के नेता राजनीति में एकदम नालायक हैं।
काँग्रेस के पास इतना पैसा है कि उस पैसे के बल पर कुछ भी किया जा सकता है। लेकिन इन पैसों का क्या फायदा हुआ? हिंदू लोगों ने इतना स्वर्थत्याग किया उसका क्या फायदा हुआघ् गांधी का कहा मान कर जनता ने इतना स्वार्थ त्याग किया उसका क्या फायदा हुआ? हालात इतने अनुकूल होते हुए जो आदमी कुछ नहीं कर सकता वह नेता बनने के लिए लायक नहीं होता।
अब मैं इसके दूसरे पहलु के बारे में बताता हूं। इस देश में कई ऐसी जातियां हैं जिनका अपना कोई संगठन नहीं। उनमें कई भेदाभेद हैं। क्योंकि वे कई धर्मों के और जातियों के हैं। सभी लोग अपने भेदभाव भूल कर, एक दूसरे पर भरोसा कर एक होकर अगर कुछ मांगने लगे तभी अंग्रेज सरकार उनके बारे में सोचगी। हम अगर नोट देकर मांगेंगे तो अंग्रेज सरकार यह देश छोड़ कर जाएगी। काँग्रेस की स्थापना के समय उसे हम सबकी एकता का महत्व अच्छी तरह पता था। इसीलिए हमें दिखाई देगा कि काँग्रेस में सभी धर्मों के लोग थे। उस वक्त हिंदू, मुसलमान, ईसाई, पारसी आदि जातियों के लोग कांग्रेस के अध्यक्ष बने हुए हमें दिखाई देते हैं। इसीलिए सभी लोगों को काँग्रेस के बारे में अपनापन महसूस होता था।
1920 से काँग्रेस की बागडोर गांधी के हाथ आई। तभी से मौलाना आजाद के अलावा काँग्रेस के सभी सूत्रधार हिंदू हैं। व²कग कमेटी में केवल दो ही मुसलमान हैं। यह देश अब ऐसे मुश्किल दौर में है कि जातीय भेदभाव को अब राजनीतिक महत्व प्राप्त हुआ। जातियों के बीच जो भेदभाव थे। उन्हें अब राजनीति से जोड़ा गया है। मुसलमान अब न केवल धर्म से ही दूर हुए हैं बल्कि वे अब राजनीति में भी दुश्मन बन गए हैं। क्योंकि काँग्रेस ने अल्पसंख्यकों के लिए कुछ नहीं किया है। इस बात का अहसास होने के कारण ही मुसलमान तेजी से काँग्रेस से किनारा कर रहे हैं। इसी से काँग्रेस नेताओं की योग्यता के प्रमाण मिलते हैं। राष्ट्रीय नेशनलिस्ट मुसलमान अब काँग्रेस से निकल कर देश का विभाजन करने चले हैं। कांग्रेस का निर्माण करने वालों के मन में क्या कभी देश के टुकड़े करने की कल्पना भी आती? लेकिन ऐसा हो रहा है, और ऐसा क्यों हो रहा है? यह सयाने लोगों की राजनीति है या पागलों की? जातिवाद का भस्मासुर डरा क्यों रहा है? यह किस बात का असर है? अगर थोड़ा सोचें तो यह हिंदुओं की राजनीति का असर है इसका पता चल जाएगा। मुंबई में ऑल इंडिया काँग्रेस पार्टी की जो बैठक हुई उसे देखें तो हिंदुओं की राजनीति का मुझे अचरज लगता है।
मैं कई बार आपसे कहता रहा हूं कि हमें राजनीतिक सत्ता मिले बगैर हमारा सामाजिक