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है। अपना बड़प्पन बताने के लिए मैं यह सब नहीं बता रहा हूं। हमारे हाथ राजनीतिक सत्ता आए तो हम क्या कर सकते हैं यह बताने के लिए मैं यह सब कह रहा हूं। मेरे साथ अगर आप में से कोई एकाध और मंत्री होता तो हम दोनों मिल कर और भी बहुत कुछ कर सकते थे। हर विभाग में मैं अगर सिर्फ पांच सालों तक रहूं तो अपने लोगों का बहुत कल्याण कर पाऊंगा। राजनीतिक सत्ता के बगैर हम कुछ नहीं कर पाएंगे इसलिए हमें राजनीतिक सत्ता पाने के लिए संघर्ष करना ही पड़ेगा। ( Politics should be the life blood of the Schedeuled Castes ), हमारा जो हाल हुआ है, हजारों सालों से हम जो इतना दयनीय जीवन बिता रहे हैं इसका एक कारण यह है कि हमारे पास राजनीतिक सत्ता नहीं थी। हमें यह सत्ता हासिल करनी होगी। राजनीतिक सत्ता अजीब ताकत है। हमें अपने दुश्मन पर उसे आजमाना चाहिए।
चुनावों के लिए एक पार्लियामेंटरी बोर्ड का निर्माण किया गया है। इस पार्लियामेटरी बोर्ड पर पांच लोग रहेंगे। उन्हें उम्मीदवार चुनने होंगे। उस बोर्ड के कुछ नियम बनाए गए हैं। उन नियमों के अनुसार ही चुनावों के लिए उम्मीदवार चुने जाएंगे। ऐसे ही लोगों को हमें चुनना होगा। अगर किसी को लगता है कि वह केवल अकेले दम पर एसेंबली में सब कुछ कर सकता है तो यह उसकी मूर्खता है। अगर कुछ कर सकता है तो उसका दल ही कर सकता है। पिछली बार चुनावों में काँग्रेस को केवल पष्थक मजदूर पार्टी का ही डर था। क्योंकि वह जानते थे कि हजारों रुपये देने पर भी काँग्रेस की सदस्यता नहीं लेंगे।
पार्लियामेंटरी बोर्ड जो कुछ करेगी और जिन लोगों को चुना जाएगा। उसी व्यक्ति को हमें जिताना होगा। हम इन चुनावों में जीतेंगे, ही यह कसम आपकोखानी होगी।
मेरी यह पक्की राय है कि छात्रों को राजनीति में हिस्सा नहीं लेना चाहिए। क्योंकि, वे अगर पढ़ाई छोड़कर राजनीति में आए तो उनका जिंदगी भर का नुकसान होता है। लेकिन इस बार इस नियम को थोड़ा ढीला करना होगा। वे अपनी अनाड़ी जनता को मदद करें ताकि मतदाताओं की सूची में वे अपना नाम दर्ज करा सकें। उन्हें चुनाव के बारे में पूरी जानकारी दें।
इस बार का इलेक्शन हिंदुस्तान के इतिहास में स्मरणीय होने वाला है। क्योंकि सा विधान का नया मसौदा तैयार करना है। इस चुनाव के बाद जो संविधान समिति निर्माण होने वाली है, वह संविधान का जो मसौदा बनाने वाली है वह आगे लंबे समय तक चलने वाला है। उस भावी संविधान में हमारा क्या हिस्सा होगा इस ओर हम सभी को ध्यान देना है। हमने जो विभिन्न प्रस्ताव पारित किए हैं उसमें हमने अपनी योजना जाहिर की है। यह इलेक्शन सचमुच हमारे जीने-मरने का संघर्ष है। इस बार अगर हम जागते नहीं रहे तो हमारा नाश अटल है। आगे चल कर यह जो ‘स्वराज’ बनने जा रहा है वह हमारे किए ‘जुल्मी राज’ बनने जा रहा है।