223 23.11.1945 मजदूरों की बेहतरी के लिए जो रकम जोड़ी जा रही है धनिक उसका विरोध न करें - नई दिल्ली - Page 506

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* मजदूरों की बेहतरी के लिए जो निधि जोड़ी जा रही है, धनिक

उसका विरोध न करें

27 नवंबर, 1945 को नई दि८ी में सातवीं हिंदी मजदूर परिषद का आयोजन किया गया था। परिषद की अध्यक्षता स्वीकारी थी डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने। इस अवसर पर दिए अपने भाषण में उन्होंने सरकार के मजदूरों से संबंधित क्या कर्तव्य हैं इस बात का विवरण देते हुए मजदूरों के जीवनस्तर में सुधार कैसे लाया जा सकता है यह बताया। मजदूरों की समस्याओं से संबंधित रॉयल कमीशन की सिफारिशों पर अमल करना और अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठनों के करारों की शर्तों को मान्यता प्रदान करने के मामले में हिंदुस्­ तान सरकार ने क्या किया यह बताने के बाद डॉ. बाबासाहेब ने कहा, रॉयल कमीशन द्वारा की गई दस महत्वपूर्ण सिफारिशों को अब तक मान्यता नहीं प्राप्त हुई है तथा अंतर्राष्ट्रीय मजदूर संगठन की 63 शर्तों में से 49 शर्तें अभी तक मंजूर नहीं हुई हैं। ऐसा नहीं कि उनकी मंजूरी से सरकार को कोई नाखुशी है, शर्तों में किसी तरह के फेर-बदलाव के बगैर मंजूरी दी जाने की शर्त के कारण देर लग रही है। मुझे लगता है कि श्रमिकों की बेहतरी के लिए जो निधि जोड़ी जा रही है धनिक उसका विरोध न करें। युद्ध काखर्चा पूरा करने के लिए कर देना धनिकों को अखरता नहीं इसलिए मजदूरों की सुख-सुविधा के लिए निधि जोड़ने के लिए उनके विरोध की कोई वजह नहीं बनती।

युद्धखत्म दुआ है और शांति प्रस्थापित हुई है। इस संक्रमण काल में मजदूरों के हालात में बदलाव लाने के लिए सुधार लाना आवश्यक है। मेरा मानना है कि काम के समय के कटौती करवाना, न्यूनतम वेतन तय करना आदि बारे में कानून बनाना और मजदूरों की संस्थाओं को मान्यता देना आदि सुधार होना जरूरी है इन सुधारों को लागू करने में देर नहीं होनी चाहिए इस ओर ध्यान देने का निश्चय मैंने किया है। मजदूरों के कानून बनाने में अंग्रेजों को सौ साल लगे। इसलिए हमें भी सौ सालों तक इंतजार करना होगा यह दलील समर्थन योग्य नहीं है।

युद्ध के लिए इकट्ठा किए गए कर से अगर सार्वजनिक हित के काम किए जाते तो कई निराश्रितों को जगह दी जा सकती थी। कितने ही अधनंगे लोगों को कपड़े और भूखों को अनाज दिया जा सकता था। कितने अनपढ़ लोगों को शिक्षा दी जा सकती थी और कितने रोगियों का इलाज किया जा सकता था, ऐसे सवाल मजदूर सभी मत्सदियों से पूछ सकते हैं।

* जनताः 1 दिसम्बर, 1945