486 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* मुझे केवल स्वराज नहीं संपूर्ण स्वराज चाहिए
मुंबई प्रांतीय शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के अधिवेशन में उपस्थित रहने के लिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर शुक्रवार दिनांक 30 नबंबर, 1945 की सुबह अहमदाबाद में आए। पूर्वनिर्धारित कार्यक्रम के अनुसार उसी दिन दोपहर उन्हें अहमदाबाद महापालिका की ओर से म. गांधी हॉल में उन्हें मानपत्र प्रदान किया गया। वह इस प्रकार था-अहमदाबाद महापालिका द्वारा डॉ. बाबासाहेब को दिया गया मानपत्र-
डॉ. बी. आर. अम्बेडकर, एम.ए.,डी.एससी, बार. एट-ला. के नाम,
हमारे ऐतिहासिक शहर अहमदाबाद में आप पधारे, यह हमारा अहोभाग्य मान कर हम आपका हार्दिक स्वागत करते हैं। आप देश के प्रमुख नेताओं में से एक हैं। छह करोड़ अस्पृश्यों के दिल में आपका अडिग स्थान है। गहरीखाई में फंसे तथा पैरों तले रौंदे गए लोगों के उद्धार के लिए अपना जीवन समर्पित कर आपने हिंदुस्तान के एक महत्वपूर्ण घटक का नेतृत्व आपने जीता है।
अस्पृश्यों के साथ से परहेज करने वाले लोगों के स्वामित्व में सभी शैक्षिक संस्थाएं होने के बावजूद सभी संकटों का सामना करते हुए आपने असामान्य उच्च शिक्षा प्राप्त की। करोड़ों अस्पृश्यों को कई सदियों से हीन-दीन स्थितियों में कैद कर रखने वाली निदंनीय पुरातनपंथी सोच पर प्रहार कर अस्पृश्योंद्धार के द्वार पूरी तरह सेखोलने का कठिन काम अपनी असामान्य बुद्धि के सहारे अचंभे में डालने वाली धीरोदत्रता के साथ आप ही ने कर दिखाया। अपनी भगीरथ कोशिशों से अस्पष्ष्य समाज की शैक्षिक तथा अन्य प्रगति करते हुए सामाजिक समता और जनतंत्र प्रस्थापित करने में आपने बहुत बड़ा योगदान दिया है। इस देश के सामाजिक समता आंदोलन के आप ही सच्चे निर्देशक हैं।
चालीस करोड़ लोगों के हितसंबंध जिससे जुडें हैं उस, हिंदुस्तान के भावी संविधान को बनाते हुए छह करोड़ अस्पृश्य जनता के बारे में सोचा जाए, उनकी अनुभूति के बगैर यह संविधान अस्तित्व में नहीं आ सकता इस बात की सरकार को घोषणा करनी पड़ी क्योंकि आपके नेतृत्व में, आपके मार्गदर्शन में चल रहे अस्पृश्यों के आंदोलन के अदमनीय सामर्थ्य का सरकार को अहसास हो गया था। हिंदी राजनीति में अस्पृश्यों को प्राप्त इस सम्मानपूर्ण और महत्वपूर्ण स्थान की सफलता का श्रेय आपको तो जाता है।
* जनताः 1 और 8 सिदम्बर, 1945