488 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
क्या कभी कोई यह कह भी सकता है कि देश को स्वराज नहीं चाहिए? मैं संपूर्ण स्वराज चाहता हूं। काँग्रेस के 50 वर्षों के कार्यकाल में कभी इस प्रकार की स्थितियां पैदा नहीं हुई थीं।
काँग्रेस के राजनीतिक नेताओं से मुसलमानों का भरोसा उठ गया है। छह करोड़ अस्पृश्यों का भी काँग्रेस में विश्वास नहीं। काँग्रेस के नेता अगर चतुर राजनीतज्ञों की तरह पेश आते तो ऐसा नहीं होता। इन बातों पर बहुसंख्य हिंदु गौर करें।
स्वराज अब हमारी आंखों के आगे, नजर के दायरे में है। अब अंग्रेज सरकार यहां लंबे समय तक रह नहीं सकेगी। लेकिन हम उसे आज ही हटा भी नहीं सकते क्योंकि हिंदी लोगों के बीच एकता नहीं। आज जहां मेरा सम्मान किया जा रहा है और मुझे पता है कि यह काँग्रेस का गढ़ है, इसके बावजूद मैंने अपनी राय प्रकट की क्योंकि मैं चाहता हूं कि मेरी राय काँग्रेस हाईकमान तक पहुंचे।