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* चुनावों के जरिए ही राजनीतिक सत्ता हासिल की जा सकती है।
गुजरात के प्रसिद्ध ऐतिहासिक शहर अमदाबाद में- गांधी-व८भभाई के राज्य में- साबरमती के विशाल किनारे पर लाल दरवाजे के बनाए गए बुद्ध नगर में मुंबई प्रांतीय शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन का पहला अधिवेशन 29 और 30 नवंबर, 1945 को बड़े उत्साह के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। भारतीय अस्पृश्यों के महान नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर 30 नवंबर, के दिन इस ऐतिहासिक अधिवेशन में विशेष रूप से उपस्थित थे।
अहमदाबाद के सभी श्रमिकों ने मिलें बंद करवा कर उनका भरपूर स्वागत किया। बेहद गर्व की यह बात विशेष रूप से जिक्र करने योग्य है। तड़के 5 बजे से अहमदाबाद स्टेशन पर लोगों का हुजूम उनके स्वागत के लिए उपस्थित था। इस जनसैलाब में शांति और व्यवस्था कायम करने की कोशिश समता सैनिक दल के वीर सैनिक कर रहे थे। कई व्यक्ति और संस्थाओं की ओर से पुष्पहार अर्पण कर उनका स्वागत किया गया। डॉ. बाबासाहेब जिंदाबाद, अम्बेडकर कौन है, ‘दलितों का देव है’, ‘दलित फेडरेशन की विजय हो’, ‘पृथक मताधिकार हासिल करो’, जैसे नारों से अहमदाबाद का पूरा वातावरण गूंज उठा था। स्टेशन पर उनके विशेष सैलून में कम्युनिस्ट पार्टी, रॉयीस्ट पार्टी, हिंदू महासभा आदि पार्टियों के नेताओं ने और कई गण्यमान्य व्यक्तियों ने उनसे साक्षात्कार किया और उनका सम्मान किया। अहमदाबाद शहर का वातावरण उनके आने से बेहद उत्साहपूर्ण हुआ था। हालांकि यह आश्चर्य की नहीं वरन् गर्व की बात थी कि उसी दिन मुंबई के गवर्नर साहब का भी अहमदाबाद में आगमन हुआ था। लोगों की भीड़ से कोईखद्दरधारी देशभक्त गर्दन उचका-उचका कर देख रहे थे। भीड़ में बड़ी मुश्किल से राह बना कर आया एक किसान पूछताछ करने लगा। गांधी टोपी पहने एक व्यक्ति ने उसे जवाब दिया, गवर्नर साब आवे छे। मेरे पड़ोस मेंखड़ा किसी दूर के गांव से आया एक अस्पृश्य युवक गांधी भक्त का धिक्कार करते हुए बोला, बापदा कोई अंधाने गूंगा पण जाणे छे के बाबा अम्बेडकर आवेला छे, उससे यह तेज जवाब पाकर शर्मिदा हुआ बनीया तुरंत वहां से निकल गया। प्रांताध्यक्ष श्री गायकवाद और ऑल इंडिया शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के महासचिव श्री राजभोज ने दर्शनोलुक जनसमुदाय से विनति की कि वे शांतिपूर्ण ढ़ंग से परिषद के स्थान पर अपने नेता का संदेश सुनने के लिए बड़ी संख्या में उपस्थित हों तो सभी शांतिपूर्ण ढंग से अपने-अपने घरों के लिए निकल गए। रात देर तक जागना पड़ा
* जनताः 8 दिसम्बर, 1945