30 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
में ऐसी आस के जगने से उनकी अलौकिकता का ही परिचय मिलता है।
खासकर आज का दिन बाजार का दिन होने के बावजूद, अपनीखरीददारी-बिक्री जल्दी-जल्दी निपटा कर लोग बीबी-बच्चों समेत चालीसगांव स्टेशन पहुंच रहे थे। डॉक्टर साहब के आने के बारे में कोई हैंडबिल आदि भी नहीं निकाले थे। केवल सुनी-सुनाईखबर के भरोसे भारी संख्या में उनके दर्शनों के लिए वहां जनसमुदाय इक्ट्ठा हुआ था।
उसके बाद सबसे प्रेमपूर्वक विदा लेकर डॉ. बाबासाहेब 6. 45 की गाड़ी से धुले गए। उनके साथ में उत्साही युवा कार्यकर्त्ता डी. जी. जाधव और दत्तात्रय मागाडे भी थे। रात डॉ. बाबासाहेब के बो²डग आने की बात पता चलते ही वहां दियों से सजावट की तैयारी की जाने लगी। डॉ. बाबासाहेब के इंतजार में बो²डग से स्टेशन तक के दो फर्लांग के रास्ते में सड़क के दोनों तरफ लोग जत्थे बनाकरखड़े थे। लोगों में अनुशासन बनाए रखने के लिए पहलवान धावजी ने अपने अखाड़े के साथ मिल कर व्यवस्था कायम की थी। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को स्टेशन से ले आने के लिए वकील श्री हरिभाऊ पाटसकर की पत्नी सौ. वारुबाई पाटसकर ने अपनी गाड़ी दी थी। श्री पाटसकर कहीं बाहर गए थे, इसलिए उनकी डॉक्टर साहब से मुलाकात नहीं हो पाई।
शनिवार, 31 जुलाई, 1937 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर सुबह की गाड़ी से कोर्ट के काम के लिए धुले में पक्का आने वाले हैं इस बात की जानकारी मि. पाटील वकील से पता चलते ही समतावादी दलित मंडल के कार्यकर्त्ताओं ने पहले से पूरी तैयारी की थी।
खबर के अनुसार 31 जुलाई, 1937 के दिन 70-80 स्काउट्स के साथ हजारों अस्पृश्य भाई-बहन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का स्वागत करने के लिए तड़के ही बड़ी उत्सुकता के साथ धुले स्टेशन पर हाजिर थे। धुले स्टेशन पुरुष, महिलाएं और बच्चों की भीड़ से खिला था। लोग बार-बार अम्बेडकर का जयघोषणा कर रहे थे। सामाजिक पद भी गा रहे थे। स्वागत के लिए श्री ए. आर. सावंत, पुनाजीराव तलिंगकर, तुकारामजी पहलवान, श्री ढेंग, जी. एस. आहिरे, आर. बी. अहिरे, सुकदेव पहलवान, धोंडिराम पहलवान, सखाराम पहलवान, देवरामपंत आहिरे आदि लोग उपस्थित थे।
गाडी ठीक 8.20 बजे स्टेशन में आई। हास्यवदन डॉक्टर साहब श्री डी. जी. जाधव, एमएलए के साथ गाड़ी से उतरे। उनके गाड़ी से उतरते ही, ‘अम्बेडकर कौन है। दलितों का राजा है।’ ’’अम्बेडकर जिंदाबाद’’ नाम के नारों से वातावरण गूंज उठा। पहले श्री सावंत, ढेंगे, बैसाणे, पुनाजीराव ललिंगकर आदि लोगों ने उनका साक्षात्कार किया। समतावादी दलित मंडल के सचिव श्री तुकराम पहलवान ने संघ की ओर से और सौभाग्यवती पार्वताबाई अहिरे ने चोखामेला बो²डग की ओर से लाए गए हार डॉ. बाबासाहेब को पहनाए उसके बाद स्टेशन से ट्रेवलर्स बंगलो तक मि. पाटील की मोटर से डॉ. बाबासाहेब का जुलूस