103 31.7.1937 साम्राज्यवाद से हजारों गुना बुरा है ब्राह्मण - चालीसगांव - Page 52

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निकाला गया। जुलूस के दौरान अम्बेडकर चौक, ललिंग, अवधान, वर्व्हाल, पुरानी धुले मिल आदि जगहों के स्काउट के लोगों ने अनुशासन बेहतर तरीकों से बनाए रखा। जुलूस जब बंगले तक पहुंचा तो पाया कि वहां भी महिलाएं, पुरुष और बच्चों की अपार भीड़ इक्ट्ठा थी। उस भीड़ में ललिंग से आईं सिर पर ढोकर लकडि़यां बेचने वाली महिलाएं भी थीं। बाबासाहेब के दर्शन के बगैर लोग बंगले से हटने के लिए तैयार नहीं थे। तब डॉ. बाबासाहेब मुस्कराते हुए बंगले से बाहर आए। उन्होंने लोगों से कहा कि अभी तो मुझे कोर्ट का काम है। वह पूरा हो जाए, उसके बाद आप जहां कहें मैं आपसे मिलने जरूर आऊंगा। यह बताने के बाद उन्होंने लोगों से विनती की कि वे वहां से हट जाएं।

दोपहर तक डॉ. अम्बेडकर का कोर्ट का काम पूरा हुआ। चार बजे वह हरिजन सेवक संघ के सचिव श्री बर्वे वकील के घर पहुंचे। वहां श्री जाधव एमएलए, श्री सावंत, श्री पुनाजीराव ललिंगकर, श्री तुकाराम पहलवान और श्री ढेंगे आदि लोगों के साथ टी पार्टी हुई। वहां काँग्रेस के कुछ लोग भी उपस्थित थे। वहां काफी विचार-विमर्श हुआ। बाद में डॉ. बाबासाहेब राजेद्र हरिजन छात्रालय और चोखामेला बो²डग भी गए। वहां चोखामेला बो²डग, स्वोद्धारक छात्रालय, हरिजन छात्रालय की ओर से उन्हें फूलमालाएं और गुलदस्ते अर्पण किए गए।

पहले से तय कार्यक्रम के अनुसार इसके बाद धुले विजयानंद थिएटर में डॉ. बाबासाहेब का जोरदार भाषण हुआ। थिएटर में स्पृश्यस्पृश्य लोगों की बड़ी भीड़ इक्ट्ठा थी। जगह की कमी के कारण कई लोगों को बाहर बैठना पड़ा।

डॉ. अम्बेडकर ने कहा-

काग्रेस ने फरमान निकाला है कि कल 1 अगस्त का दिन साल के पहले दिन की तरह मनाया जाए। कांग्रेस पार्टी ने राजनीति की बागडोर सम्हाली इसलिए वह स्वराज हुआ और हम जैसे किसी के हाथ आए तो स्वराजय नहीं कहना क्या ठीक है? भावना और सिद्धांतों- फलसफों को अगर किनारे सरका कर देखें तो पता चलेगा कि मजदूरों को परेशान करने वाले मिल-मानिक, गला दबोचने वाले साहूकार तथा हमें कई तरीकों से सताने वाले अन्य लोग तो जैसे हैं वैसे ही रहने वाले हैं। इसलिए अब हमें पहले से अधिक सावधान रहना होगा। इतने दिनों से एक बात हमारे पक्ष में थी कि अंग्रेज जाति नहीं मानते थे और स्पृश्यास्पृश्य के बारे में सोचा नहीं करते थे। अबके बाद सत्ता आपको सताने वालों के हाथ गई है। अब हम लोगों की फरियादें कौन सुनेगा? हमारे लिए यह स्वराज नहीं, औरों का हम पर चलने वाला राज है। इसलिए संगठन बनाना आपका कर्त्तव्य है। संगठन ना बनाने से आपका सौ गुना अधिक बुरा हाल होगा। आज अगर महारों के साथ अन्याय हो तो पाटील, हवलदार, मामलेदार कोई उनकी मदद नहीं करता। इतना