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दिनों तक तरह-तरह से उन्हें परेशान करने के बाद अस्पृश्य हिंदुओं ने उन्हें धमकी दी कि आपको मरी हुई पडि़या उठानी ही पड़ेगी वरना आप 505 का हर्जाना दो। बेगार कर के सड़क की मरम्मत करो वरना आपका यहां रहना मुश्किल कर देंगे। एक और उदाहरण है कविठा गांव का। वहां से अस्पृश्यों के झोंपड़े हटाए। पानी में मिट्टी का तेल डाल दिया। इस तरह कई तरीकों से वहां के अस्पृश्यों को परेशान किया। वहां के लोगों ने गांधी के सामने अपनी शिकायतें रखीं। लेकिन गांधी ने क्या किया? उन्हें गांव छोड़ जाने की सलाह दी। (शेम-शेम की ध्वनियां) ऐसी सलाह गांधी ने नहीं दी कि- जो जुल्म ढाते हैं उन्हें सजा दो या उन पर कानूनी कार्रवाई करो। यह है गांधी की नीति। विधिमंडल की सीटों पर हमारे उम्मीदवारों को भेजने का उद्देश्य है हम पर होने वाली जुल्म-जबर्दस्तियों काखात्मा करना। हमारा उम्मीदवार वहां जाकर हमारी शिकायतें रखेगा। हम पर होने वाले अत्याचारों के प्रति न्याय की मांग करेगा। हमारे हित के लिए हमेशा संघर्ष करेगा। विधिमंडल के चुनावों में हिस्सा लेना ही हमारा अंतिम उद्देश्य है। काँग्रेस के टिकट पर चुने जाने वाले हरिजन उम्मीदवारों से पूछिए। दो साल और सात महीनों के आपके कार्यकाल के दौरान आपने अस्पृश्यों के लिए क्या किया? उन्होंने विधिमंडल में क्या एकाध प्रश्न भी उठाया? क्या एकाध प्रस्ताव भी रखा जिससे कि आपका हित हो? तो फिर वे वहां गए क्यों? वॉइसराय की नई घोषणा के अनुसार केन्द्र सरकार में अस्पृश्यों का प्रतिनिधि लेने की बात तय हुई। लेकिन गांधी ने आपके खिलाफ शिकायत की। आपके प्रतिनिधि को यानी मुझे वहां से निकालने की कोशिश की थी। आज भी ये कोशिश जारी है। काँग्रेस के पीछे पड़े हरिजनों ने गांधीजी के सामने बीचबचाव किया। गांधी ने उन्हें बताया कि तुम्हें कुछ नहीं मिलेगा। इस हालात के बारे में आप जरा ठंडे दिमाग से सोचें। यह परीक्षा की घड़ी है। हजारों सालों से हमें गुलामी में कैद कर रखा गया है। हम भी उस गुलामी के घाव झेल रहे हैं। इसलिए अब इस गुलामी को जड़समेत उखाड़ कर फेंकने के लिए आप तैयार हों। इसके लिए हमें राजनीतिक सामर्थ्य यानी सत्ता हासिल करनी होगा। गांधी के धोखेबाज दिल पर विश्वास ना करें। आगे दो हजार सालों तक उसमें कोई परिवर्तन नहीं आएगा। किसी और पर निर्भर न करें। हमेंखुद अपना उद्धार करना होगा। ध्यान में रखें कि राजनीतिक सत्ता मिले बगैर हमारा उद्धार संभव नहीं। (तालियां)। इस प्रकार आगामी चुनावों का बहुत महत्व है। हमारी लड़ाई कौरव-पांडवों की तरह की भिडंत है। हिंदू और अस्पृश्यों के बीच की लड़ाई निर्णायक है। इन चुनावों से इस देश का भविष्य तय करने वाली संविधान समिति बनेगी। उसमें बहुसंख्य और अल्पसंख्य जनजातियों के संबंधों के बारे में निर्णय होगा। हमारे सुयोग्य और काबिल उम्मीदवारों को जाना चाहिए। इसके लिए जी-तोड़ कोशिश करनी चाहिए। विधिमंडल की सभी सीटें हमें पानी होंगी। नया राजनीतिक संविधान आने वाला है। तब काँग्रेस और हिंदू महासभा में सुलह होगी। और ध्यान में रखें कि ये हिंदू लोग हजार सालों पहले की स्थितियां वापिस ले आएंगे। काँग्रेस के लोग