225 30.11.1945 चुनावों के जरिए ही राजनीतिक सत्ता हासिल की जा सकती है - अमदाबाद - Page 515

494 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

स्वराज की पुकार लगाते हैं लेकिन मैं उनसे एक सवाल पूछता हूं कि हम पर किसका राज चलेगा? पाटीदार-धनिक तालुकदार-पूंजीपति या, वरिष्ठ हिंदुओं का राज? पिछले बीस वर्षों से मैं यही पूछ रहा हूं। अन्य किसी से भी अधिक हमें स्वराज पाने की जल्दी है। हम अपना राज्य चाहते हैं। हमारा वही स्वराज सत्ता होगा। पिछली बार जंग छिड़ी तो काँग्रेस ने सरकार के साथ असहयोग किया। काँगे्रस ने सरकार से कहा, जंगखत्म होने के बाद अगर स्वराज देने का वचन मिलेगा तभी हम सरकार की मदद करेंगे, कहा। काँग्रेस ने सरकार से जो सवाल किया वहीं सवाल आज काँग्रेस से पूछना चाहता हूं। न्याय, नीति, सच्चाई और ईमानदारी हो तो वे स्वराज में अस्पृश्यों को योग्य प्रतिनिधित्व देकर शिक्षा, नौकरी और सामाजिक उन्नति के संदर्भ में स्वराज में अस्पृश्यों के लिए योग्य रियायतें और सुरक्षा देने का भरोसा दिलाएं। लेकिन वे इस प्रकार का आश्वासन नहीं देते। इस बारे में वे कुछ नहीं बोलते। जो बोलते नहीं उनके पेट में कुछ बुराखौलता रहता है। जहर होता है। यह बात ध्यान में रखें। मेरे गुजराती बंधुओं! मुझे महाराष्ट्र की कोई चिंता नहीं सताती। क्योंकि वे संगठित हैं। वे किसी के भुलावे में नहीं आते। संगठन की सामर्थ्य के कारण वे विरोधियों को हराएंगे इसका मुझे यकीन है। महाराष्ट्र की ही तरह गुजरात में अस्पृश्यों के लिए चार सीटें हैं। फेडरेशन इन चार जगहों पर चुनाव लड़ेगा। वह पीछे नहीं हटेगा। हम जानते हैं कि हमारे विरोधियों के पास प्रकार-पैसा और मानव संसाधन विपुल है। लेकिन इनके बल पर विजय पाना असली विजय पाना नहीं। हम मार कर मरेंगे लेकिन रणभूमि से भागेंगे नहीं। यही हमारा निश्चय है। उसे सफलता दिलाना अब आपके हाथ में है। काँग्रेस के झूठे प्रचार और घूसखोरी को ठोकर मार कर उड़ा दीजिए। कहते हैं पैदल तीर्थयात्रा करने से पुण्य मिलता है। उसी प्रकार आगामी चुनावों में अपने समाज के उद्धार का पुण्य प्राप्त करने के लिएखुद अपने पैरों पर चल कर फेडरेशन के उम्मीदवारों को अनपा वोट दें। उन्हें जिताएं अखिल भारतीय दलित फेडरेशन ही अपनी एक मात्र राजनीतिक संस्था है। उस पर भरोसा रखें। आप एकजुट हों। आखिर में मैं आपसे एक ही बात कहना चाहता हूं कि आपके इस अहमदाबाद शहर में बहुत बड़ी संख्या में मिल मजदूर हैं. उनमें से बहुसंख्यक मजदूर अस्पृश्य हैं। विधिमंडल में इस शहर के श्रमिकों के प्रतिनिधियों की दो जगहें हैं। पिछली बार मजदूर महाजन और काँग्रेसवादी संस्था ने अस्पृश्य श्रमिकों के मतों से गुलजारीलाल नंदा और कंडूभाई देसाई को जिता कर विधिमंडल में भेजा। ये क्या कभी हमारे प्रतिनिधि बन पाएंगे। इस बार ये दोनों सीटों पर हम अपने उम्मीदवारों को जिताएंगे, पूंजीपति और काँग्रेस की सोच से चलने वाले मजदूर महाजन संस्था का विश्वास न करें। अखिर आप सभी को एक इशारा देता हूं। भविष्य को पहचानों, अपनी गुलामी नष्ट करने के लिए आने वाले चुनाव जीतिए। (तालियां और जयध्वनि)