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* कामगारों के लिए मानवी हक जरूरी हैं
गुरूवार, दिनांक 6 दिसंबर, 1945 के दिन दोपहर 11 बजे सचिवालय में लेबर कमीश्नर, सलाहकार और अन्य अधिकारियों की परिषद का मुंबई में उदघाटन करते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा, आज तक हालात ऐसे थे कि सभी सरकारी नियंत्रण मुट्ठी भर सत्ताधारियों के हाथ में थे। उनकी मगरूर कार्यशैली के कारण कामगारों का दबना और औद्योगिक विकास संभव था लेकिन अब वह जमाना नहीं रहा। आज जमाना बदल गया है। सत्ता और कानून के बल पर कामगारों को दबाना, उन पर हुकुम चलाना अब संभव नहीं। आज संविधान के अनुसार हिंदुस्तान सरकार कुछ कर नहीं पाती। मजदूरों की समस्याएं प्रांतिक सरकार के तहत होने के कारण मुश्किल होती है। धन के बल पर मजदूर तो मिल सकते हैं लेकिन उनके साथ मनमाना व्यवहार नहीं किया जा सकता। मजदूर भी इन्सान हैं और इन्सान के होने के नाते जो अधिकार मिलते हैं वे उन्हें भी मिलना जरूरी है। युद्धखत्म हो चुके हैं लेकिन पूंजीपति और मजदूरों की लड़ाईयां कम महत्वपूर्ण नहीं। आज हिंदुस्तान की सरकार के सामने तीन मार्ग हैं- सुलह, कामगारों का वेतन निश्चित करना, कामगार और मालिक के संबंध तय करना। इन्हीं पर इस परिषद में सोचा जाना जरूरी है।
* जनताः 15 दिसम्बर, 1945