227 9.12.1945 शिक्षा के बगैर महत्वपूर्ण पद हासिल नहीं किए जा सकते - मनमाड - Page 517

496 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* शिक्षा के बगैर महत्वपूर्ण पद हासिल नहीं किए जा सकते

1 और 8 दिसंबर, 1945 के ‘जनता’ के अंक में मुंबई इलाका शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के अध्यक्ष श्री भा. कृ. गायकवाड़ ने एक सार्वजनिक सूचना प्रकाशित की। इस सूचना में कहा गया था कि अपने समाज के इकलौते नेता, नेक नामधारी डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर एम.ए., पीएच डी.डी. एससी, बार. एट-लॉ और हिंदुस्तान सरकार के मजदूर मंत्री (लेबर मेंबर) के लिए व्यस्तता के कारण नासिक, अहमदनगर, पश्चिमिखानदेश और पूर्वखानदेश आदि हर जिले की यात्रा करना संभव नहीं हो पाया इसलिए इन चार जिलों की ओर से रविवार 9 दिसंबर, 1945 को शाम 4 बजे मनमाड जैसी केन्द्रीय जगह पर सभा का आयोजन किया गया है। अस्पृश्य माने गए समाज का आज का कर्तव्य विषय पर वह सार्वजनिक भाषण देंगे। ऐसे सुनहरे मौके का फायदा सभी भाई और बहनें उपस्थित रह कर अवश्य उठाएं। इस प्रकार पहले से की गई घोषणा के अनुसार रविवार, 9 दिसंबर, 1945 के दिन मनमाड में बहुत बड़ी सभा हुई।

सभा में हिस्सा लेने के लिए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मुंबई से रविवार सुबह की गाड़ी से निकले।

करीब छह-सात सालों के बाद महाराष्ट्र में अस्पृश्यों के इस गढ में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर जा रहे थे। अस्पृश्य जनता अपने वंदनीय नेता के दर्शनों के लिए आतुर थी। दूर-दूर से आते लोगों के झुंड मनमाड़ की ओर कुछ कर रहे थे। चिलचिलाती धूप में, कांटों-कंकड़ों से जाती राह पर वे चले जा रहे थे। रसद की गठरी अपनी पीठ पर बांधे, अस्पृश्यों के आंदोलन की जयकार करते हुए, बहुत दिनों बाद अपने इलाके में अपने नेता के दर्शन होंगे, इस आस को मन में लिए इन चारों जिलों से अस्पृश्य जनता आंनद और उत्सुकता के साथ मनमाड में इकट्ठा हो रही थी। बड़ी संख्या में लगभग पौन लाख अस्पृश्यों का जमावड़ा वहा जुटा था।

दोपहर ठीक सवा दो बजे डॉ. बाबासाहेब की गाड़ी स्टेशन में आई। जयघोष से जमीन और आसमान गूंज उठा। कुछ समय तक जयघोष का कंपार्टमेंट फूलमालाओं से लदा था। पूछताछ करने पर पता चला कि मनमाड के रास्ते में पड़ने वाले हर स्टेशन पर जहां-जहां गाड़ी रुकी थी। वहां लोगों ने उनका हार्दिक स्वागत करते हुए उन पर

* जनताः 15 दिसम्बर, 1945