497
फूलों की वर्षा की थी। साढ़ेतीन बजे के आस पास स्टेशन से बड़ा जुलूस निकला। शहर के प्रमुख हिस्सों से होता हुआ करीब दो मील की दूरी पर बसी अस्पृश्यों की बस्ती में आने के बाद मनमाड के अस्पृश्य छात्रों के लिए बा²डग की इमारत की नीव रखने के समारोह में डॉ. बाबासाहेब ने कहा, राजनीतिक आंदोलनों को हम जितना महत्व देते हैं उतना ही महत्व हमें शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए देना होगा। शिक्षा के बगैर हम महत्वपूर्ण पद हासिल नहीं कर सकते। और जब तक महत्वपूर्ण पद हम हासिल नहीं करते तब तक यह नहीं कहा जा सकता कि सत्ता हमारे हाथ आई है। असल में प्रांत के सरकारों को शिक्षा की व्यवस्था करनी चाहिए। लेकिन ऐसा कुछ हुआ दिखाई नहीं देता। मैंने पहले भी बताया है और यहां संदर्भानुसार बताना जरूरी है इसलिए बता रहा हूं कि मैंने हिंदुस्तान की सरकार से अस्पृश्यों की शिक्षा के लिए तीन लाख रुपयों की मंजूरी ही है। इससे हमारे कई छात्रों को बजीफे मिल रहे हैं। दुर्भाग्य की बात यह है कि हमारे अधिकतर छात्र ही अनुत्तीर्ण होते हैं। इसकी वजह मेरी समझ में नहीं आ रही है। मैं छोटा था तब इस छोटे-से शामियाने जितनी ही हमारीखोली थी जिसमें हमारा पूरा परिवार रहता था। उसमें बहन के दो बच्चे, एक बकरी, एक चाकी, सिल आदि सब होता था। साथ में टिमटिमाता हुआ तेल का दीपक। इतनी गरीबी के बावजूद मैंने पढ़ाई की। बो²डगों में हमारे छात्रों के लिए इससे कई गुना अच्छा प्रबंध होने के बावजूद वे दिन-रात मेहनत से पढ़ाई क्यों नहीं करते? आप जानते हैं कि जो पैसा देते हैं वे उसका हिसाब भी मांगते हैं। हिंदुस्तान सरकार भी पूछेगी कि अस्पृश्यों के लिए हम जो इतना पैसाखर्च करते हैं, तो उन्होंने उसका सार्थक उपयोग कैसे कियाघ् इसिलिए हमारे छात्रों को मेहनत से पढ़ाई कर पास होना चाहिए। क्या पता, कल अगर कांग्रेस मिनिस्ट्री, प्रदान मंडल सत्ता में आएंगे तो क्या करेंगे? इसीलिए मैं अभी से तीन लाख रुपयों की रकम को पांच लाख रुपये करवाने की कोशिशों कर रहा हूं।
भाषण के बाद डॉ. बाबासाहेब के हाथों अस्पृश्य छात्र बो²डग की इमारत की नींव का पहला पत्थर रखा गया।