228 9.12.1945 अधिकारों के किले अपने कब्जे में हों तो डरने की जरूरत नहीं - मनमाड - Page 519

498 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* अधिकारों के किले अपने कब्जे में हों तो डरने की जरूरत नहीं

9 दिंसबर, 1945 को मनमाड के अस्पृश्य विद्यार्थी बो²डग की इमारत की नींव का पत्थर रखने के बाद डॉ. बाबासाहेब अमबेडकर सार्वजनिक सभास्थल पर आए। सभा की शुरूआत ठीक सवा छह बजे हुई। मुंबई प्रांत शेडयूल्ड कास्टस फेडरेशन के अध्यक्ष श्री भाऊराव कृ. गायकवाड़ और आंध्र प्रांतिक शाखा के सचिव श्री सूर्यप्रकाशमराव के शुरूआती भाषणों के बाद डॉ. बाबासाहेब बोलने के लिए उठखड़े हुए। करीब पौन लाख अस्पृश्य जनता के सामने एक घंटे तक उन्होंने भाषण दिया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच अपने भाषण की उन्होंने शुरूआत इस प्रकार की-

बहनों और भाइयों,

आज छह-सात सालों के बाद मैं यहां आया हूं। पूरे हिंदुस्तान में अस्पृश्य समाज के कार्य के बारे में, उनके संघर्ष के बारे में महाराष्ट्र में सबसे अधिक जागरूकता है इसलिए इस हिस्से में बार-बार आने की मुझे जरूरत नहीं महसूस होती। इसके बावजूद आज यहां आना महत्वपूर्ण है इस बात का यकीन होने के कारण आज मैं यहां आया हूं।

आज इस देश में काँग्रेस, मुस्लिम लीग, हिंदु महासभा जैसे कई राजनीतिक दल हैं। हर पक्ष अपनी तरफ से राजनीतिक मांगें रख रहा है। मुसलमान लोग पाकिस्तान मांग रहे हैं, काँग्रेस स्वराज मांग रही है, हमें भी स्वराज चाहिए। स्वराज को लेकर काँग्रेस और हमारे बीच मतभेद नहीं, काँग्रेस के लोग अंग्रेजों को बता रहे हैं कि हिंदुस्तान हमारा है। हिस्तान की राजनीति की चाभियां हमारे हाथ में दो और हिंदुस्तान छोड़ कर चलते बनो। लेकिन पिछले 20 सालों से मैं काँग्रेस से एक सवाल पूछ रहा हूं जिसका जवाल गांधी या काँग्रेस के अन्य लोग नहीं दे रहे हैं।

वह सवाल है कि आप जिस स्वराज की मांग कर रहे हैं उसमें किस पर किसका राज होगा? राज कौन करेगा? किस पर किया जाएगा? क्या हिंदु अस्पृश्यों पर राज करेंगे? स्वराज जो मिल रहा है वह किसका स्वराज यानी हमारी गुलामी ही होगी ना?

यही सवाल पिछले बीस सालों से मैं काँग्रेस वालों से और गांधी से पूछ रहा हूं। वे इस प्रष्न का जवाब नहीं दे रहे और उनके मन में कुछ गलत होगा तभी वे इस सवाल का जवाब नहीं दे रहे हैं। आपकों सोचना यह है कि हमें जो स्वराज मिल रहा है तो उसमें हमें असल में मिल क्या रहा है?

आज हम पर कौन से काम लादे गए हैं? झाडू लगाना, नालियों की सफाई करना

* जनताः 15 दिसम्बर, 1945