32 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
ही नहीं महार भी दूसरे महार की मदद नहीं करता। इसीलिए जातिय संगठन जरूर करें। अन्याय जब हो रहा हो कम से कम तब उसकी मदद जरूर करें। पैसों के बगैर कोई काम नहीं होता। वकील, गवाह, कोर्ट का कामकाज, गाड़ी का किराया आदि सभी बातों के लिए पैसा जरूरी होता है। इसलिए, न्याय पाने के लिए जाति का फंड बनाए।
कोशिश कर एक गांव में अगर आप न्याय पाएंगे तो उसकी दहषत अन्य गांवों में भी फैलेगी। कोई और आकर आपके लिए काम करे ऐसी उम्मीद क्यों रखते हो? आपके लिए श्री बर्वे या श्री गांधी आकर छात्रावासखोलें ऐसा आप क्यों सोते हैं? महाराष्ट्र में 10 लाख अस्पृश्य महार लोग हैं। हर कोई एक रुपया देगा तो दस लाख का फंड इक्ट्ठा होगा।
अब अग्रेज कुछ कर नहीं पाएंगे। इसका एक उदाहरण मैं आपको देता हूं। बादशाह की ओर से गवर्नर को भेजे अज्ञापत्र में कहा गया है कि मंत्रीमंडल में जितने लेना संभव हो उतने अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधियों को लें। आज का मंत्रीमंडल गांधी के कहने पर बना है। मुंबई के मंत्रीमंडल में महारों-मांगों का एक भी प्रतिनिधि नहीं है इसके बावजूद इस मामले में अंग्रेजों ने बिल्कुल दखल नहीं दिया। कुछ लोग मुझसे पूछते हैं कि मैं काँग्रेस में क्यों नहीं शामिल हुआ? कारण में बताता हूं। वे इस प्रकार हैं-
- काँग्रेस की राजनीति से अगर कुछ हुआ है तो वह ब्राह्मण्य का उदय ही हुआ है
यह मैं देख रहा हूं। छह प्रांतों में मुख्यमंत्री कौन बने देखिए- ब्राह्मण ही मुख्यमंत्री
बने हैं। और में कहता हूं कि साम्राज्यवाद से ब्राह्मण हजारों गुना बुरा है।
- मुझसे कहा जाता है कि, अस्पृश्यों के लिए मैं जो आंदोलन करता हूं उसे बंद
करो। लेकिन न मुझे तनख्वाह पाने की लालसा है और न ही मैं सम्मान पाना
चाहता हूं। मेरी आकांक्षा बस यही है कि आप लोग स्वाभिमानी बनें। उसके
लिए अलग से आंदोलन चलाना आवश्यक है। आप में और मुझमें बस यही
फर्क है कि मुझे आपकी तुलना में अधिक ज्ञान है। इसीलिए मैं ज्यादा स्पृश्ता
से देख सकता हूं और जानता हूं कि जोखिम या धोखा कहां है। काँग्रेस के लोग
भले कुछ भी कहें, मुझे उसकी परवाह नहीं है। आप इंसान की तरह जीएंगे
तो मैं समझूगां कि मेरे परिश्रम सफल हुए। यह स्वराज शुखदायी जोखमभरा
है। सामाजिक सत्ता जिनके हाथ थी राजनीतिक सत्ता भी उनके ही हाथ गई
है। इसीलिए अब हर गांव कम से कम दस रुपए फंड में दें। ताकि आप लोग
न्याय पा सकें। अपने पृथक मजदूर पक्ष के पंद्रह लोग एसेंब्ली में है। ये लोग
एक धागे में मजबूती से पिरोए हुए हैं। उनमें आपसी फूट या मनमुटाव बिल्कुल
नहीं। इसीलिए काँग्रेस को अगर किसी पार्टी से डर लगता है तो वह हमारी
पार्टी है। काँग्रेस को मुसलमानों से अथवा ‘‘लोकशाही’’ पार्टी से नहीं लगती।
श्री वल्भ भाई पटेल ने पुणे में जो भाषण दिया उसमें उजागर हो चुकी है। हम