229 10.12.1945 अन्याय का विरोध किए बगैर अपना उद्धार कैसे संभव है? - द अकोला (वन्होड) - Page 524

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* अन्याय का विरोध किए बगैर अपना उद्धार कैसे संभव है?

वन्हाड प्रांतीय शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन की पहली परिषद अकोला (वन्होड) में 9 और 10 दिसंबर, 1945 को हुई थी। इस परिषद में अमरावती, बलढाणा, यवतमाल, अकोला और मध्य प्रांत जैसे दूरदराज के इलाकों से सैंकड़ों प्रतिनिधि उपस्थित हुए थे। इस परिषद में करीब पौन लाख लोग शामिल हुए थे।

परिषद कीखासियत

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर पहली बार अकोला में आ रहे थे इसलिए वन्हाड प्रांत के चारों जिलों से हजारों पुरुष और महिलाएं बाबासाहेब के दर्शनों के लिए आए हुए थे। दो-दो दिनों की यात्रा करके भी कुछ लोग अपने प्रिय नेता के दर्शन करने और उनका संदेश सुनने के लिए आए हुए थे। बाबासाहेब अकोला में आ रहे हैं इस बात की पहले सेखबर होने के कारण सिनेमा हॉल में दस दिन पहले से विज्ञापन दिखाया जा रहा था- कि अखिल भारतीय बहिष्कृत वर्ग के इकलौते नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर 10 दिसंबर, 1945 को अकोला में आएंगे और भाषण देंगे।’’ सो, बाबासाहेब के आगमन के बारे में अकोला ही नहीं पूरे वन्हाड की जनता को उत्कंठा थी कि हमारे अनभिसिक्त राजा, हमारे नेता से कब हमारी मुलाकात होगी। अकोला आने तक जिन-जिन स्टेशनों पर गाड़ी रुकी थी वहां हर स्टेशन पर उनका हार्दिक स्वागत किया गया था जिस कारण पूरी रात उन्हें परेशानी हुई थी। अखबारों के प्रतिनिधियों को साक्षाकार देने और मध्य प्रांत के नेताओं के साथ आगामी चुनावों से संबंधित विषयों पर करीब पौन घंटे तक बातचीत करते के बाद प्रमुख नेताओं की तस्वीर ली गई।

जुलूस की शुरूआत अकोला स्टेशन से हुई। जुलूस तीन-चार फलीग लंबा था। अकोला स्टेशन से तिलक मैदान तक के रास्ते पर दोनों तरफ भीड़ जमा थी। इस जुलूस में अखिल भारतीय शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के उत्साही महासचिव श्री राजभोज, भारतीय संस्थान शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के अध्यक्ष सुबटया, म्यु. कामगार परिषद के नियोजित अध्यक्ष श्री सज्जनसिंह, शांताबाई दाणी-नासिक से आदि शामिल थे। वन्हाड प्रांत के जिलों से आशा समता सैनिक दल भी जुलूस में बड़े उत्साह के साथ शामिल हुआ था और उसने जुलूस में व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी बहुत अच्छे ढंग से सम्भाल रखी थी। दोनों ओर सैनिक दल, बीच में नेताओं की गाडियां, पीछे महिला मंडल

* जनताः 22 दिसम्बर, 1945