229 10.12.1945 अन्याय का विरोध किए बगैर अपना उद्धार कैसे संभव है? - द अकोला (वन्होड) - Page 525

504 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

और अन्य जनसमूह थे। जुलूस में सबसे आगे थे विभिन्न वाद्यों के साथ उन्हें बजाने वाले कलाकार। उनके पीछे मर्दाना खेल दांड-पट्टा और उनके पीछे बैंड़। इस प्रकार बड़े उत्साह के साथ बाबासाहेब की जय बोलते हुए जुलूस चल रहा था। जुलूस में कई तरह नारे लगाए जा रहे थे जिनकी आवाज से वातावरण गूंज रहा था जैसे- ‘डॉ. अम्बेडकर कौन है? दलितों का राजा है! शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन की जय हो।’ ‘हरिजन शब्द का धिक्कार है’ ‘अम्बेडकर जिंदाबाद! थोड़े दिन में भीमराज!’

इस प्रकार के अपूर्व माहौल में ‘जुलूस साध्वी रमाबाई अम्बेडकर नगर’ में विसर्जित हुआ। उसके बाद श्री सुबटया के हाथों झंडा वंदन का कार्यक्रम हुआ। अध्यक्ष द्वारा ऊपर चढ़ाया शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन का नीला झंडा ऊंचे जाकर फहरा। समता सैनिक दल द्वारा झंडे को सलामी दी गई। उस वक्त तालियों की गड़गड़ाहट और फेडरेशन की जयकार में वातावरण गूंज उठा था।

श्री सुबटया की अध्यक्षता में समता सैनिक दल की परिषद संपन्न हुई। उसके तुरंत बाद शांताबाई दाणी की अध्यक्षता में महिला परिषद ली गई। सौ, गीताबाई गायकवाड़ और मिसेस नाईक ने महिलाओं को स्फूर्तिदायक आदेश दिया और उसके बाद परिषद का कामकाज संपन्न हुआ। ठीक साढ़े पांच बजे डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का मंडप में आगमन हुआ। उस वक्त आकाश को छेदने वाले नारों से और तालियों की गड़गड़ाहट से समूचा वातावरण आनंदभरा हो उठा था। धेयनिश को समर्पित उस अस्पृश्य वर्ग के स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का यह दिव्य प्रतीक देख कर स्वधर्मी और विधर्मी लोगों के मुंह से अपने आप धन्योद्गार निकल रहे थे।

परिषद का कामकाज

ठीक साढ़े छह बजे परिषद की शुरूआत हुई। नागपुर के शेंद्रे वकील ने सुस्वर में गायन प्रस्तुत किया। स्वागताध्यक्ष श्री डी. जेड. पलसपगार ने अपने भाषण में उपस्थित जनसमुदाय और डॉ. बाबासाहेब का स्वागत किया। उसके बाद अकोला के अकर्ते बकील (काँग्रेस), अमृतकर वकील (हिंदू महासभा), म्युनिसिपल कमेटी के अध्यक्ष रावबहादुर आठल्ये, मुस्लिम लीग के सदस्य श्री काजी वकील ने बाबासाहेब की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और बताया कि डॉ. बाबासाहेब केवल अस्पृश्यों के ही नहीं वरन् अखिल भारत के नेता हैं, वह एक तपस्वी हैं। उन्होंने इस घोषणा के बाद बाबासाहेब के आंदोलन के बारे में और फेडरेशन के बारे में आदर व्यक्त किया। उके बाद डिप्रेस्ड क्लासेस एसोसिएशन के महासचिव रावसाहब ठवरे ने इस बात का जिक्र कर अपना वक्तव्य पूरा किया कि वे अपना पक्ष छोड़ कर फेडरेशन पक्ष में किस प्रकार शामिल हुए। उसके बाद श्री इंगले ने अखिल वन्हाड प्रांत के अस्पृश्य जनता की ओर से मानपत्र पढ़कर सुनाया। फिर डॉ.