229 10.12.1945 अन्याय का विरोध किए बगैर अपना उद्धार कैसे संभव है? - द अकोला (वन्होड) - Page 527

506 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

में पैदा हुआ इसका मैं क्या सकता हूं? मेरे खिलाफ कही जाने वाली यह बात झूठी है। मेरे विभाग में सिमला में 28 कलर्कों में से 18 भंगी है। * विलायत जाने वालों में 1 मांग, 1 भंगी और बहुत सारे चमार हैं। एक और बात मैं इसके साथ ही बताना चाहता हूं। एक मैला-कुचैला भंगी उम्मीदवार जब शिमला में इंटरव्यू के लिए आया था तब मुझे पता चला था कि उसे यकीनन इनकार किया जाएगा। तब मैंने अपना वजनखर्च कर उसे चुनना दिया। अब वह विदेश में है। मैं आत्मश्लाघा कर रहा हूं ऐसा बिल्कुल न समझें। बस मैं यह समझाना चाहता हूं कि राजनीतिक सत्ता हाथ में हो तो इंसान क्या क्या कर सकता है। इसीलिए, इज्जत और इंसानियत भरा बर्ताव पाने के लिए अस्पृश्य समाज को राजनीति काबिज करनी चाहिए। यानी, फेडरेशन के प्रतिनिधियों को विधिमंडल में जाकर हम पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए। यह हमारी एक मांग है।

1920 में गांधी ने हरिजन संघ बनाया उस संघ के जरिए हरिजन छात्रों को वजीफे देना शुरू किया। उद्देष्य यही था कि हमारे स्वाभिमानपूर्ण आंदोलन से उन्हें अलग करना। अपने गुट में शामिल करवा लेना। इस मामले में अस्पृश्य छात्रों से मैं बस इतना ही कहना चाहूंगा कि ऐसे लालचों का आप जितना फायदा उठा सकते हैं, उठाइए। लेकिन अपना कर्तव्य न भूलें। मैं आपसे यही कहना चाहता हूं। पुराणों में देव-देत्यों के बीच युद्ध हुआ था। इसमें विजय पाने के लिए देवों ने कच को भेज कर संजीवनी मंत्र सीखने की जुगत लड़ाई थी। कच की मानसिकता को अपना कर उसी के जैसा बर्ताव करो। इसी में समाज का हित है।

इस देश में कई जातियां और धर्म हैं। उनमें सामाजिक समता या संगठन नहीं है। दो जातियों के बीच रोटी-बेटी का व्यवहार नहीं होता, अगर होता है तो उसे केवल अपवाद मात्र जानें। महार का बेटा अगर ब्राह्मण की बेटी से विवाह करता है या ब्राह्मण की बेटी महार के बेटे से शादी करती है तो मुझे उस बारे में कुछ नहीं लगता। लेकिन मैं एक बात पूछता हूं कि क्या इस प्रकार के विवाहों से अस्पृश्यों की अस्पृश्यता नष्ट होगी? हमारी बच्चियां क्या काली हैं? क्या उनकी नाक पिचकी है? या वे कुरूप हैं? एक बात और मैं आपसे पूछना चाहता हूं अस्पृश्य लड़के का अस्पृश्य लड़की से विवाह को क्या हासिल?

स्वराज्य के मसले पर हममें कोई मतभेद नहीं। लेकिन स्वराज में हमें अपने अधिकार मिलने चाहिए। मैं काँग्रेस से बस यही कहना चाहता हूं कि आपके स्वराज में हम पर किसका राज होगा इस सवाल का जवाब दीजिए।

* मूल संहिता में आंकड़ा नहीं दिया है हालांकि बाबासाहेब ने पुणे, दिए अपने भाषण में इस बात का

जिक्र आता है