229 10.12.1945 अन्याय का विरोध किए बगैर अपना उद्धार कैसे संभव है? - द अकोला (वन्होड) - Page 528

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फिलहाल हमारे पास कोई साधन नहीं हैं। स्पृश्य लोगों के हाथों में सत्ता है इसलिए जो उनकी मर्जी हो वहीं वे तय कर देते हैं। उनके पास काफी पैसा है, वाहन हैं तथा अन्य चीजें भी हैं। हमारे पास यह सब नहीं है। इन चीजों के प्रति मोह पर हममे से कई लोग बलि चढ़ गए हैं। लेकिन मैं नहीं चढ़ा। (हंसी) सो, मैं आपको यह बात साफ तौर पर बता रहा हूं कि इस प्रकार के साधनों की उम्मीद बिना रखे केवल अपने दल के प्रति अपना कर्तव्य मानते हुए पैदल चल कर जाएं और जिनके पास मताधिकार हैं वे बिना मूल्य के समाज सेवा की भावना से फेडरेशन के उम्मीदवार को ही वोट दें। यही उनका श्रेष् कर्तव्य है। देश के अल्पसंख्यकों को लगने वाला डर दूर करने के लिए परिश्रम करने की बात कांग्रेस कह रही है लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। समूचे देश का प्रतिनिधि होने का उसका अपने बारे में किया जा रहा प्रचार धोखे में डालने वाला है। बडे पैमाने पर लोगों से समर्थन हासिल करने की यह काँग्रेस के नेताओं की कोशिश है। अंग्रेजों के चले जाने के बाद तथा स्वराज मिलने के बाद विभिन्न अल्पसंख्यकों के हकों की केंद्र सरकार कैसे रक्षा करेगी इस बात पर सोच-विचार करने के लिए काँग्रेस को चाहिए कि वे एक हिंदी गोलमेज परिषद बुलाए और विचार विमर्श करे। ऐसा करने के बजाय काँग्रेस ने अन्य पक्षों को धता बताते हुए दावा करना षुरू किया कि सत्ता उसी के हाथ में रहनी चाहिए। काँग्रेस का यह दुराग्रह हम बरदाश्त नहीं करेंगे। मैं आपको यही सलाह दूंगा कि काँग्रेस से अलिप्त रहें।

आज सुबह एक व्यक्ति ने मुझसे मिल कर कहा हम हर तरह से स्पृश्यों पर निर्भर हैं इसलिए अगर हम उनके खिलाफ शिकायत करने जाएं तो कोई अस्पृश्य अधिकारी सुनने तक के लिए राजी नहीं होता। हम क्या करें? मैं कहता हूं, यह बात सच है लेकिन मैं आपसे पूछता हूं कि भेड़ बन कर ऐसा जीवन और कितने दिन जियोगे? अन्याय के खिलाफ कभी न कभी तो मुंहखोलना ही पड़ेगा न? अन्याय का विरोध किए बगैर क्या हमारा उद्धार होना संभव है? कोट, बूट, पैंट पहन कर मैं आपके सामनेखड़ा हूं मेरे हाथ में सोने की घड़ी है। मैं साफ-सुथरा हूं। मुझे महार कहने की हिम्मत किसी में है क्या? इसके बावजूद मैं महार हूं। (हंसी) मैं अगर पहले ही हार मान कर बैठ जाता तो क्या यह स्थिति आती? मेरे हाथ में आज जो सोने की घड़ी दिखाई दे रही है, क्या वह दिखाई देती? (हंसी) कहने का मतलब ये है कि अन्याय के खिलाफ आपको ‘जैसे को तैसा’ न्याय से विरोध करना सीखना होगा। अपने कर्तव्य के प्रति जागरूक रहिए। सो, मैं आपसे आखिर इतना ही कहना चाहता हूं कि अब के बाद का समय आपातकाल है। उससे मुकाबले की तैयारी मजबूत नींव पर होनी चाहिए। फेडरेशन के सभी उम्मीदवारों को बहुमत से जिताना होगा। हिंदुस्तान सरकार ने घोषणा की है कि प्रांतीय विधिमंडल में जीतने वाले प्रतिनिधियों में से ही संविधान समिति चुनी जाएगी। इस समिति के द्वारा तैयार होने वाला संविधान कई सालों तक अस्तित्व में रहेगा। हो सकता है वही कायम भी हो। काँग्रेस हमारी कुछ सीटें जीतेगी तो हमारा नुकसान होता। हम अलग लक्ष्य हासिल नहीं कर पाएंगे। इसलिए दिन-रात कोशिश कर हमें सभी सीटें जीतनी होंगी। यही उपदेश कर मैं अपना भाषण समाप्त करता हूं।