103 31.7.1937 साम्राज्यवाद से हजारों गुना बुरा है ब्राह्मण - चालीसगांव - Page 54

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भी चुनावों के दौरान एकता से पुणे आए, और संगठन के साथ बरते इसलिए

यह फल मिला। चुनाव के दौरान हमने जो शपथ ली उसे कायम रखें। हमारी

संस्था की शाखा हर जिले में स्थापन की जानी चाहिए। ऊपर से मदद करने

वाला अपना जब कोई नहीं होता तब सत्ता जो कष्ट उठाता है उसकी होती है।

एकजुट होकर कोशिश करो कि हर संस्था में हमारे अधिक से अधिक लोग

शामिल हों। काँग्रेस के मन में हरिजनों के प्रति दया होती तो क्या वह बिना

किसी शर्त के किसी हरिजन को मंत्रीमंडल में नहीं लेती? इसके लिए हम

किसी से भीख नहीं मांगे। मैंने काँग्रेस के लोगों से कभी मशविरा नहीं किया।

काँग्रेस से मैं हमेशा सवा मील दूर रहा।

खानदेश में हमारे पक्ष के श्री दौलत गुलाजी जाधव चुनाव जीत गए हैं। उनसे काम करवा लेना। इस देश में हमारे साथ इंसानियत भरा व्यवहार नहीं किया जाना यह बात आप भूल सकते हैं, लेकिन मैं कभी नहीं भूल सकता। हमेशा जागरूक रहें तभी सफलता मिल सकती है। इस प्रकार डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ। भाषण के बाद श्रीमती नर्मदाबाई बाघ, तलिंगकर, दशरथ धाकू बाद्य, जुने धुले और अन्य तहसीलों के लोगों ने उन्हें फुलमालाएं पहनाई और सभा समाप्त हुई।

पश्चिमखानदेश जिले में बाबासाहेब इससे पूर्व सामाजिक कार्य के लिए कभी नहीं आए थे। अन्य जिलों के अस्पृश्य नेताओं ने कभी उन्हें वहां जाने के लिए कहा भी नहीं। लेकिन डॉ. बाबासाहेब की बुद्धिमता और उनका काम देखकर स्वाभिमान से परिपूर्ण अस्पृश्य जनता जाग गई थी इसमें कोई शक नहीं।

उसके बाद स्काऊट के साथ डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर चौक गए। शाम 6 बजे डॉ. बाबासाहेब की गाडी धुले स्टेशन की ओर चली। उस दिन धुले प्रताप मिल चल रही थी। पांच बजे वह बंद हो जाती। मिल का समय पूरा हुआ तब वहां से निकल कर सभी महिलाएं और पुरष डॉ. बाबासाहेब के दर्शन के लिए स्टेशन पर इक्ट्ठा हुए। वहां डॉ. बाबासाहेब को स्काऊट की ‘लाठी’ की सलामी दी गई। उसमें भीमराव सालुंके, वेसा पहलवान, शंकरराव घोडे, किसनराव आदि लोगों ने हिस्सा लिया। यहां भी कई महिलाओं और पुरषों ने बाबासाहेब को फूलमालाएं अर्पण कीं। बाद में 6.40 को सबसे विदा लेकर डॉ. अम्बेडकर की गाड़ी चालीसगांव के लिए रवाना हुई।

चालीसगांव में डॉ. बाबासाहेब आने वाले हैं यहखबर लोगों में फैली थी। लोग इक्ट्ठा होकर इंतजार कर रहे थे किखबर आई कि जिस गाड़ी से डॉक्टर साहब आने वाले थे उस रेलवे का इंजन राह में ‘सिक’ हुआ। लोग निराश हुए, एकाध-दो घंटों में इंजन की मरम्मत होगी और डॉ. बाबासाहेब को आने में ज्यादा से ज्यादा दो घंटे की देरी होगी ऐसा लोगों को लगा था। डॉक्टर साहेब के स्वागत में श्री झिपरु तुकाराम जाधव,