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जब चले जाएंगे तब हिंदुस्तान पर कौन राज करेगा। काँग्रेस के नेता बताने हैं कि काँग्रेस के अलावा अन्य किसी पक्ष को स्वराज नहीं चाहिए। लेकिन उनकी यह बात सफेद झूठ के अलावा कुछ नहीं।
मैं आप सभी दलितवर्गियों की ओर से सबको चेतावनी देता हूं कि अंग्रेजों के बाद स्थापन होनेवाली हिंदुस्तान सरकार में अगर अस्पृश्यों को दोयम स्थान दिया जाएगा तो यह बात हर्गिज बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमें अपने राजनीतिक अधिकार मिलने ही चाहिए। उन्हें पाने के लिए लड़ने का निष्चय हमने किया है।
पिछले बीस सालों में हम जैसे अल्पसंख्यकों का विश्वास पाने के लिए काँग्रेस ने कोई कोशिश नहीं की है। काँग्रेसखुद को देश की प्रतिनिधि बताती है लेकिन यह सही नहीं है। लोगों का समर्थन प्राप्त करने के लिए काँग्रेस के नेता जानबूझकर ऐसा बताते हुए लोगों को बरगला रहे हैं।
उदाहरण के तौर पर समूचा अस्पृश्य समाज कांग्रेस का समर्थक नहीं है बल्कि वह ऑल इंडिया शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के साथ है। अंग्रेज जब देश छोड़ कर चले गए तब केन्द्र सरकार में किसे कौन-सा और कितना स्थान मिले इस बारे में मतभेदों को
खत्म करने के लिए असल में काँग्रेस को चाहिए था कि वह सभी अल्पसंख्य दलों के नेताओं की एक परिषद से और सबके मन में व्याप्त संशय और अविश्वास को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए थी। लेकिन उसकी जगह काँग्रेस ने कहा कि सत्ता उसके हाथ सौंपी जाए, मानों देश में कोई और राजनीतिक दल का अस्तित्व ही न हो।
मेरे अस्पृश्य समाज की ओर से मैं सबसे कहता हूं कि काँग्रेस को हमारा प्रतिनिधित्व करने का कोई अधिकार नहीं है। और मैं अपने सभी जाति बंधुओं से दिल से बस यही कहना चाहता हूं कि हम अपना दल पृथक राजनीतिक दल के रूप में संगठित कर अपने न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए झगड़ कर ही अपना क्ल्याण हासिल कर सकते हैं।
इस नजरिए से आगामी चुनाव बड़े महत्वपूर्ण हैं। इसीलिए ध्यान रखें कि इन चुनावों में हमारे लिए आरक्षित रखी गई चौदहों सीटों पर शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन के उम्मीदवारों को ही जिताएं। जब तक सत्ता हमारे हाथ नहीं आती तब तक हमारी बातों का कोई महत्व नहीं होगा। हर तरह के कष् सहें, निर्भय बनें, किसी तरह का न्यून भाव न पालें और अपने देश के राजकाज में हमें भी हिस्सा मिलना चाहिए, इस बात के लिए हठ करें।
आगामी चुनाव हमारे समाज के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण है। हमें अगर अपनी उन्नति करनी हो तो हमें राजनीतिक सत्ता हासिल करनी ही होगी। अपने राजनीतिक अधिकारों को लेकर हमें कौन-सी आकांक्षाएं पालनी है यह कोई भी राजनीतिक दल नहीं बता सकता और कोई राजनीतिक सत्ता हमें इस मामले में पीछे हटने के लिए नहीं कह सकती। मुझे यकीन है कि अबके बाद कोई नेता अस्पृश्यों को दोयम स्थान देना