230 12.12.1945 कम्युनिस्टों से सावधान रहें - नागपुर - Page 531

510 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

चाहे तो उसे बर्दाशत नहीं किया जाएगा।

जिस प्रकार काँग्रेस अल्पसंख्यकों का विश्वास अर्जित नहीं कर पाई है उसी प्रकार सवर्ण हिंदुओं पर भी कांग्रेस का विशेष प्रभाव दिखाई नहीं देता। गांधी के नेतृत्व में काँग्रेस द्वारा चलाए गए अस्पृश्यता निवारण और मंदिर प्रवेश के अभियानों में काँग्रेस पूरी तरह से असफल रही है। उनके आंदोलन का कोई असर हुआ दिखाई नहीं देता। हाल ही में मैं जगन्नाथ पूरी गया था। वहां का जगन्नाथ मंदिर मुझे केवल बाहर से ही देखना पड़ा। उस मंदिर के अंदर जाकर मैं जगन्नाथ की मूर्ति नहीं देख पाया। इससे आप जान जाएंगे कि अपने अधिकार पाने के लिए हम केवल अपने संगठन पर ही भरोसा कर सकते हैं। हमें सैंकड़ों सालों से हिंदुओं से झेलने पड़े अत्याचारों से अपने संगठन के सहारे ही मुक्त पानी होगी।

मैं आपसे एक और बात कहना चाहता हूं कि आप कम्युनिस्ट पार्टी से सावधान रहें। क्योंकि, उनके पिछले कुछ सालों से किए जा रहे काम को देखने से पता चलता है कि वे कामगारों का अहित कर रहे हैं। बल्कि मुझे यकीन हो चला है कि वे उनके शत्रु हैं। कम्युनिस्ट कहते हैं कि कांग्रेस पूंजीपतियों की संस्था है और साथ ही बताते हैं कि कामगार उसमें शामिल हों। हिंदुस्तान के कम्युनिस्टों की अपनी कोई नीति नहीं है। उन्हें स्फूर्ति मिलती है रूस से।

जैसा कि वे बताते हैं क्या सचमुच कम्यूनिस्टों को कामगारों के बारे में अपनत्व है? अगर ऐसा होता तो वे भारतीय कामगारों का एक पृथक राजनीतिक पक्ष का संगठन बनाते। काँग्रेस से हाथ मिलाने का जो उपदेश वे अब तक करते आए हैं, नहीं करते।

काँग्रेस ने उन्हें भगा दिया है इसलिए अब वे हमसे मिल कर हमारे बीच उठापटक करने लगे हैं। इसीलिए मैं आपसे कह रहा हूं कि कम्युमिस्टों से सावधान रहिए। अपने शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन का उन्हें अपने प्रचार के लिए उपयोग न करने दें। शेडयूल्ड कास्टस् फेडरेशन ही भारतीय अस्पृश्यों की सच्ची प्रतिनिधि है। हमारे प्रांत में उसका बल बढ़ रहा है। आज यहां इकट्ठा हुई इस बड़ी भीड़ से यह बात साबित होती है। आप लोग मेरा भाषण शांतिपूर्वक सुन रहे हैं इसकी मुझेखुशी है। जिन सैंकड़ों स्वयंसेवकों द्वारा यहां का प्रबंधन किया गया है उन्हें मैं धन्यवाद देता हूं। सभी युवकों से मेरी विनति है कि वे फेडरेशन के साथ मिल कर और आगामी चुनावों में बिना वेतन के काम करने के लिए बहुसंख्या से आगे आएं।

इसी तरह आपका साथ मिलता रहा भारत की राजनीति में हमें न्यायपूर्ण हिस्सा मिलेगा जरूर।

डॉ. बाबासाहेब के भाषण के बाद वहां उमड़े जनसागर ने हर्ष से ‘जय भीम’ नारा लगाया।