34 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नथ्यू दोनू जाधराव, जाबरसाहब, मांगो आनंदा जाधव स्टेशन गए थे। बो²डग में इक्ट्ठा हुए लोगों का मनोरंजन करने के लिए मे. भास्कर मास्तर, जगन्नाथ सुन्दरनाथ के ‘पोवाडे’ प्रस्तुति का कार्यक्रम हुआ। साथ ही वेडाबाई चव्हाण, शांताबाई जाधव के बोधप्रद गीतों का गायन हुआ। बहनों के बैठने का बेहतर इंतजाम किया गया था। श्रीमती ध्रुपताबाई दिवाण, झेलाबाई पोममोरे, सखुबाई आनंदा जाधव, सावित्रीबाई तोताराम जाधव, नारददाबाई नानाजी जाधव, भागाबाई उरवा सरदार, दयाबाई रामाजी जाधव आदि मुख्य महिलाएं उपस्थित थीं। आखिर तड़के तीन-चार बजे गाड़ी स्टेशन पर आने की संभावना है यहखबर श्री रायला मास्टर ले आए। सुनते ही लोग बो²डग से निकल कर रात के बारह बजे स्टेशन पहुंचे। उसके पहुंचने से पहले ही आस-पास के गांवों के लोगों की भीड़ स्टेशन पहुंच चुकी थी। उनमें ये लोग भी शामिल हुए और पूरा स्टेशन परिसर लोगों से भर गया। तड़के चार बजे तक लोग जागते रहे। आखिर डॉ. अम्बेडकर को ले आनेवाली गाड़ी स्टेशन में आई। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जयकार से पूरा वातावरण गूंज उठा। डॉ. बाबासाहेब जैसे ही गाड़ी से उतरे वहां के समाज की ओर से श्री रायला मास्टर ने उन्हें फूलमाला अर्पण की। उसी वक्त आठ मील की पैदल यात्रा कर श्री डी. जी. जाधव के माता-पिता डॉक्टर साहब से मिलने आए। उन दोनों ने डॉ. बाबासाहेब का वंदन किया। इंजन में
खराबी आने के कारण उन्हें देर हुई थी और तुरंत 5 बजे ही गाड़ी से उन्हें मुंबई जाना था। इसलिए वह बो²डग नहीं जा पाए। वहां जुटे लोगों ने स्टेशन में ही उनका स्वागत किया। विभिन्न संस्थाओं की ओर से उन्हें कई बार पहनाए गए। डॉक्टर साहब ने प्रेम के साथ उनको स्वीकार किया। सबको उन्होंने अपने आंदोलन के हारे में संक्षेप में बता कर शामिल होने के लिए कहा। फिर सबसे प्रेमपूर्वक विदा ली। यह अपूर्व सम्मान समारोह चालीसगांव शहर में दिन भर चर्चा का विषय बना रहा।