105 23.8.1937 प्रांत मंत्रीमंडल प्रांत की बुद्धि का अलौकिक भंडार हो - मुंबई - Page 60

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* प्रांत का मंत्रीमंडल की बुद्धि का अलौकिक भंडार हो

23 अगस्त, 1937 की विधिमंडल की बैठक में शुरूआती कामकाज के बाद मुख्यमंत्री सां. बालासाहबखेर ने मंत्रियों की तनख्वाह संबंधी पहला सरकारी बिल प्रस्तुत किया। बिल के अनुसार हर मंत्री की तनख्वाह 500 रु., 100 रु. किया और 150 रु. मोटर अलाउंस दिया गया था। इस बिल को एसेंबली के सामने पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के स्वार्थत्याग की महत्ता का गुणगान किया था। इस सरकारी बिल पर स्वतंत्र लेबर पार्टी के नेता डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ। बिल के खिलाफ बोलते हुए उन्होंने इस प्रकार अपना कहना प्रभावी एवं सिलसिलेवार बिंदुओं में पेश किया। उन्होंने कहा- अब मैं भाषण करने के लिएखड़ा हुआ हूं। मैं भाषण इसलिए कह रहा हूं क्योंकि इस मुद्दे पर सभागृह में विभिन्न मतों को दर्ज कराने की मेरी इच्छा नहीं है। इस बिल को लेकर मेरी पहली आपत्ति यह है कि सरकार की ओर से यह बिल पेश किए जाने के बजाय इसे सभी पक्षों की सहमति से पेश किया जाना चाहिए था। दूसरी बात यह है कि जो तनख्वा तय की गई है वह ठीक नहीं है। अंग्रेजों के राज्य के विभिन्न उपनिवेशों पर नजर दौड़ाने से पता चलता है कि वहां के मंत्रियों की माहवार तनख्वाह लगभग रु. 2000 के आसपास है। पता चलता है कि अस्थाई मंत्रीमंडल हो तो- उड़ीसा के अपवाद से- हिन्दुस्तान के विभिन्न प्रांतों में तय की गई तनख्वाहें रु. 2000 से अधिक थीं। लेकिन अब एक नयी परिपाटीर चलाई जा रही है। सुझाव रखा गया है कि अब के बाद मंत्रियों को हर माह 500 रु. की तनख्वाह मिले। इन दो रकमों में केवल आंकड़ों का ही नहीं सिद्धान्तों का भी फर्क है। किसी भी पद के लिए तनख्वाह तय करते हुए चार मुद्दों पर सोचना जरूरी है। 1. मंत्री का सामाजिक स्थान, 2. कार्यक्षमता, 3. जनतंत्र, 4. राज्य के प्रशासन की पवित्रता और सत्यता। प्रांत के मंत्री उस प्रांत के प्रथम नागरिक होते हैं इस नाते उनका जीवन सुसंस्कृत होना जरूरी है। हालांकि इस मामले में उन पर जोर जबर्दस्ती नहीं की जा सकती। हालांकि मंत्री की तनख्वाह के बारे में सोचते हुए बाद की तीन बातों को हल्के में लेकर नहीं चलेगा।खुद मंत्री की इस बात को लेकर क्या राय है यह मैं नहीं जानता। हालांकि झंडावंदन करना था केसरिया वÐधारिणी स्वयं सेविकाओं की सलामी लेना ही मंत्री का काम नहीं होता यह उन्हें पता है ऐसा मुझे लगता है। प्रशासन के तीन प्रमुख अंगों में कार्यकारी मंडल-बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है।

* जनताः 26 अगस्त, 1937