105 23.8.1937 प्रांत मंत्रीमंडल प्रांत की बुद्धि का अलौकिक भंडार हो - मुंबई - Page 62

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बस यही मानना है कि मंत्रियों की तनख्वाह 500 रु. तय करने के पीछे मंत्रीमंडल का उद्देश्य पवित्र नहीं हैं उसके पीछे उनकी कोई योजना है। और वह यह है कि, वे चाहते हैं कि मंत्रीपद हमेशा उनके ही पास रहे, उस पर कभी किसी और का कब्जा ना हो। मैं यह भी नहीं कर रहा कि मंत्रियों की तनख्वाह हर माह 400 रु. या 3000 रु. ही हो। इस बिल की मैंने जो आलोचना की है वह केवल इसलिए कि सार्वजनिक नीति के बारे में चर्चा हो। डॉ. जॉन्सन ने एक बार कहा था कि बदमाहा लोगों के लिए देशभक्ति का आसरा लेना आसान होता है। मुझे यकीन है कि बदमाशों को मंत्री पद पर आसीन होना आसान होता है यह कहने की नौबत हम पर कभी नहीं आएगी।

डॉ. अम्बेडकर के भाषण के बाद प्रोग्रेसिव पार्टी के नेता मि. एॅबर ट्रॉम्बी ने डॉ. अम्बेडकर के ज्यादातर मुद्दों का अपने भाषण में समर्थन किया। बैरिस्टर जमनादास मेहता ने भी कांग्रेस के बिल की अव्यावहारिकता की शब्दों में समीक्षा की।खा. ब. अब्दुल लतीफ, शि. ल. करंदीकर और स. का. पाटील के भाषणों के बाद भाई अनंतराव चित्रे का भाषण हुआ।