106 28.8.1937 ऐसे भगवानों की पूजा क्यों करें? - बांद्रा (मुंबई) - Page 63

42 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

106

* ऐसे भगवानों की पूजा क्यों करें?

बांद्रा, मुंबई के मुनिसिपल हॉल में 28 अगस्त, 1937 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में अस्पृश्य वर्ग की बड़ी सार्वजनिक सभा हुई जिसमें निम्नलिखित प्रस्ताव पारित किए गए µ

पहला प्रस्ताव - मुम्बई इलाका महार परिषद के प्रस्ताव के अनुसार हमारे भाई-बहन हिन्दू धर्म के त्यौहार व्रत आदि धार्मिक विधियों और उपवास आदि धार्मिक आचारों का पालन ना करें।

दूसरा प्रस्ताव - ब्रांदा म्युनिसिपालिटी में अस्पृश्य वर्ग के लिए एक जगह आरक्षित रखने के लिए में कलक्टर साहब के प्रति यह सभा धन्यवाद प्रकट करती है। हालांकि अस्पृश्यों की जनसंख्या के अनुपात में एक जगह नाकामी होने के कारण अधिक जगहें देने की विनती यह सभा कलक्टर साहब से करती है।

तीसरा प्रस्ताव - स्वतंत्र लेबर पार्टी के सदस्य बनने की विनती यह सभा जनता से करती है।

चौथा प्रस्ताव - श्री संभाजी तुकाराम गायकवाड के मानपत्र के लिए बांद्रा पंचायत से 25 रु. दिए जा रहे हैं। अन्य जगहों की पंचायतें भी इस काम मेंखुले हाथ से मदद दें।

इन प्रस्तावों पर श्री हु. तु. शिर्कि, स. भि. धोत्रे, अमरसिंह, शं त वडवलकर, ध. सो. जाधव, म. ग. जाधव, चां. ना. मोहिते, शां. अ. उपषाम, ना. भि. असगोतकर, बांद्रे स्कूल बोर्ड मेंबर आदि के भाषण हुए।

उसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोलने के लिए उठकरखड़े हुए। सूचना देते हुए वह बोले, आज की सभा नवास कर धर्मांतरण के बारे में मुंबई इलाका महार परिषद द्वारा किए गए प्रस्ताव की याद दिलाने के लिए है। इसलिए धर्मांतरण के बारे में अगर कोई कुछ पूछना चाहें तो अवश्य पूछें। जब कोई भी अपनी आशंकाएं पूछने के लिए उठा नहीं तब डॉ. बाबासाहेब ने अपना भाषण शुरू किया। उन्होंने कहा,

प्रिय बहनों और भाइयो,

* जनताः 4 सितम्बर, 1937