44 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
तीसरी बात है दतात्रेय की। अत्री ऋषि की पत्नी अनुसूया महान पतिव्रता है ऐसा नारद ने ब्रह्मा, विष्णु, महेश इन तीन भगवानों की पत्नियों से कहा। अपने से अधिक पतिव्रता कोई हो यह उनसे देखा नहीं गया। तब इन तीनों महिलाओं ने अपने पतियों से कहा कि वे अनुसूया के पतिव्रत का हरण करें। और पत्नियों की बात मान कर ये तीन वीर इस काम को अंजाम देने निकल भी पड़े। वे तीनों अनुसूया के घर गए। उसके पति को कुछ काम बतलाकर बाहर भेजा। औरखुद अनुसूया के साथ रहे। इस सहवास से अनुसूया के एक बच्चे को जन्म दिया। इस बालक का जनकत्व देने लिए उसके तीन सिरों की कल्पना की गई। वही ये दत्तात्रेय हैं। कई लोगों को लगता है कि धर्मांतरण की लहर अब थम चुकी है। लेकिन ऐसा नहीं है। धर्मांतरण होने वाला है। मैंने यह आंदोलन नहीं छोड़ा है यह ध्यान में रखें कई हिन्दु लोग मुझसे कहते हैं कि ‘‘आपके धर्मान्तरण की कल्पना के कारण हमारी आंखेंखुल चुकी हैं। हम अब चौकन्ने हो चुके हैं। आपके प्रांत हमारे कर्त्तव्यों में अब हम चूकेंगे नहीं। इसलिए धर्मांतरण का आन्दोलन आप अब रोक दीजिए। लेकिन अब तक मैंने जो कुछ कहा है उन्हें वजहों के लिए मैं यह आंदोलन रोकना नहीं चाहता। आप पूरी तरह सोचिए। दूसरा धर्म अगर स्वीकारना है तो पूरी तरह जांच-परख कर ही स्वीकारना होगा। उम्मीद करता हूं कि आगे से महार जाति के सभी लोग महार परिषद द्वारा किए गए प्रस्ताव के अनुसार ही पेश आएंगे।’’
भाषण के बाद धन्यवाद समर्पण, फूलमाला, गुलदस्तों के अर्पण के बाद डॉ. अम्बेडकर की जयकार की ध्वनि के बीच सभा समाप्त हुई।