107 6.11.1937 कानून ऐसे बनवा लें कि बहुजन समाज के साथ अन्याय न हो - मसूर (सातारा) - Page 66

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* कानून ऐसे बनवा लें कि बहुजन समाज के साथ अन्याय न हो

6 नवम्बर, 1937 को दिन मसूर जिला सातारा में सातारा जिला महार परिषद का 7वां अधिवेशन डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर डॉ. बाबासाहेब के स्वागत के लिए हजारों पुरुषों-महिलाओं का जनसमुदाय इक्ट्ठा हुआ था। परिषद शुरू होने से पहले मोटर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की दो मील तक ही शोभा यात्रा हुई। पाचगणी, दहिगांव और अन्य जगहों के समता सैनिक दलों ने जुलूस में बेहतरीन अनुशासन रखा था। डॉ. साहब के नाम की जयकार से पूरा वातावरण गूंज रहा था। स्पृश्य वर्ग के समाज बंधवों को यह अपूर्व और उत्साही वातावरण देखकर जरूर अचरज महसूस हुआ हो। जुलूस में अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के साथ-साथ स्वागताध्यक्ष मि. के. एस. सावंत, एमएलए गाड़ी में बैठे थे। उनके बाद वाली गाड़ी में विधायक श्री राजाराम भाउ भोले, एॅड. विनायकराव गडकरी, अण्णासाहब पोतनीस आदि नेता बैठे थे। शाम तीन बजे के आसपास यह जुलूसखास परिषद के लिए बनाए गए भव्य शामियाने में आए। डॉ. बाबासाहेब के दर्शन पाने के लिए लोगों के झुंड मंडप के प्रवेश द्वार की ओर आ रहे थे। इसलिए कुछ समय तक शामियाने के अन्दर व्यवस्था बनाए रखने में थोड़ी कठिनाई हुई। समता सैनिक दल की बेहतरीन व्यवस्था के कारण परिषद में पूरे समय बढि़या व्यवस्था कायम रही।

स्वागत गीत के बाद परिपाटी के अनुसार डॉ. बाबासाहेब को अध्यक्ष स्थान के लिए चुना गया। उस वक्त तालियों और जयकार की प्रचंड ध्वनि हुई। उसके बाद स्वागताध्यक्ष मि.खंडेराव एस. सावंत का भाषण हुआ। उन्होंने अपने भाषण में अध्यक्ष डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का परिचय देते हुए कहा, ‘‘कई हुए, कई हैं, कई होंगे लेकिन इनके जैसा कोई नहीं’’ डॉक्टर साहब के बारे में उनका वर्णन अत्युक्ति नहीं थी। इसके बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाशण हुआ। उन्होंने कहा,

बहनों और भाइयों,

मसूर गांव का नाम सुनते ही मुझे बचपन की अस्पृश्यता से सबंधित झेलनी पड़ी सभी कड़वी बातें याद आती हैं और आज भी आंखों में आंसू आ जाते हैं। इस गांव में आज मैं 35 वर्षों के बाद आया हूं। इस ओर गोरेगांव में जब तालाब बनाया था तब

* जनताः 13 और 20 नवम्बर, 1937