50 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* इंसान होकर भी क्या रोटी कमाने के लिए स्वाभिमान भुला दोगे?
7 नवम्बर, 1937 के दिन दौंड, जिला पुणे में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में सभा का आयोजन किया गया था। पुणे जिले का यह हिस्सा बहुत पिछड़ा हुआ है। इसीलिए डॉ. अम्बेडकर ने वहां जाकर हालात का जायजा लिया। सो ठकुबाई रोकडे, लक्ष्मीबाई डिखले, भीमाबाई मचार, चिमाबाई सोनवणे, गोधाबाई, भागीरथी बाई रोकडे, जयाबाई भिंगारदिवे आदि महिलाओं ने डॉ. अम्बेडकर का पंचारती से आरती उतार कर स्वागत किया। उसके बाद सभा आरंभ हुई। पहले विधायक राजाराम भोले ने सबका स्वागत करते हुए डॉ. अम्बेडकर को अध्यक्ष पद स्वीकारने की विनति की। डॉ. भ ाऊसाहब गडकरी ने उनके कथन का समर्थन किया।
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपने भाषण में कहा,
प्रिय बहनों और भाइयों,
मुझे लगा नहीं था कि यहां आकर मुझे अधिक बोलना नहीं पड़ेगा। आप लोगों से मुलाकात के बाद कार्यक्रम पूरा होगा ऐसा लगा था। लेकिन यहां के हालात देखकर मुझे दो शब्द बोलने पड़ रहे हैं। आज की सभा का मुख्य उद्देश्य है स्वतंत्र लेबर पार्टी की शाखा की स्थापना करना। हमारा यह पक्ष केवल अस्पृश्यों के लिए नहीं है। जो लोग मजदूरी कर पेट पालते हैं और जो किसान हैं उनके लिएखासकर इस पक्ष की स्थापना की गई है। अपने इस पक्ष की स्थापना होकर अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है। लेकिन पक्ष के कार्य का विस्तार बढ़ता जा रहा है। इसीसे इस पक्ष की आवश्यकता का अहसास होता है। काँग्रेस कभी मेहनतकश वर्ग का कल्याण नहीं करेगी। काँग्रेस केवल माया है। इस महामाया के जाल में फंस कर अपना अद्यःपतन होने नहीं देना। कोई भेडि़या जब भेड़ से कहे कि चलो, मैं तुम्हें स्वर्ग दिखाता हूं तो सयाने लोग जानते हैं कि वह भेड़ को स्वर्ग में ले जाने के बजाय राह में ही मौका पाकरखा जाएगा। इसलिए, आप समय रहते सावधान हो जाइए। सच क्या है और झूठ क्या है इसका अपनी बुद्धि का इस्तेमाल कर फैसला कीजिए। अपना हित साधने की अगर आपकी इच्छा है तो आज ही स्वतंत्र लेबर पार्टी के सदस्य बनें। हमारे अधिक से अधिक लोगों का विधिमंडल में जाना जरूरी है। वे ही हमारा उचित प्रतिनिधित्व करते हुए हमारे हित के काम करेंगे।
* जनताः 20 नवम्बर,, 1937