110 14.11.1937 अपने अस्तित्व को स्वतंत्र रखे बगैर दुख व्यक्त नहीं किया जा सकता - भवानी पेठ (पुणे) - Page 74

53

110

* अपने अस्तित्व को स्वतंत्र रखे बगैर दुख व्यक्त नहीं किया जा

सकता

मद्रास के बहिष्कृत समाज आदि द्रविड़ समाज की बस्ती मुम्बई के सायन के धारावी हिस्से में हैं। उस हिस्से में चमड़ी पर प्रक्रिया करने या चमड़ी पकाने, कमाने के जो कारखाने हैं उसमें वे मजदूर के तौर पर काम करते हैं। इस समाज के कुछ युवक ‘आदि-द्रविड़ युवक संघ’ नाम की एक संस्था चलाई है। इस संस्था की ओर से रविवार की 14 नवम्बर, 1937 को माटुंगा के बपू हॉल में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की अध्यक्षता में एक सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा में श्री कमलकांत चित्रे, श्री शांताराम उपशाम और डी. वी. प्रधान आदि लोग आमंत्रित मेहमान के तौर पर उपस्थित थे। सभा की शुरूआत में आदि-द्रविड़ समाज से डॉ. बाबासाहेब को मानपत्र अर्पण किया गया और बाद में संस्था के कुछ मामूली काम निपटाए गए।

मानपत्र स्वीकारते हुए डॉ. बाबासाहेब ने भाषण दिया। उन्होंने कहा,

प्रिय बहनों और भाइयों,

मानपत्र देकर आपने जो मेरा गौरव किया है उसके लिए मैं आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं। आप सब लोग मद्रास प्रांत से मुम्बई में काम करने आए हैं। अपने गांव आप आते-जाते रहते हैं। अपने प्रांत के अन्य लोगों से जब भी आपकी मुलाकात होती है तब आप उन्हों एक बात समझाइए। अब जो नया संविधान आया है उसमें अस्पृश्य वर्ग को जो राजनीतिक अधिकार प्राप्त हुए हैं वे अभूतपूर्व हैं। अब से पहले अपने बारे में कभी ऐसी बात नहें हुई थी। जो अधिकार मिले हैं उनका उपयोग अगर अस्पृश्य भाई-बहनों के हित में नहीं हुआ तो उनका मिलना न मिलना एक समान। अन्य किसी प्रांत से मद्रास प्रांत के बहिष्कृत वर्ग को अधिक जगहें मिली हैं। साथ ही, यह भी कहना पड़ेगा कि अन्य किसी प्रांत से आपके प्रांत के अस्पृश्य वर्ग के दुख अधिक हैं। ऐसी स्थितियों में आपको मिले राजनीतिक अधिकारों का क्या आपने उचित इस्तेमाल किया है? इस प्रश्न के जवाब में बड़े कष्ट के साथ रहना पड़ेगा कि नहीं, आप अपने कर्त्तव्यों को पूरा करने से चूक गए हैं। 30 में से केवल कुछेक अपवादों को छोड़ कर अन्य सभी प्रतिनिधि काँग्रेस में तदाकार हो गए हैं।

* जनताः 20 नवम्बर, 1937