110 14.11.1937 अपने अस्तित्व को स्वतंत्र रखे बगैर दुख व्यक्त नहीं किया जा सकता - भवानी पेठ (पुणे) - Page 75

54 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

परिणामस्वरूप उस प्रांत के अस्पृश्य वर्ग की शिकायतों को गौण स्थान प्राप्त हुआ है। आपको अस्पृश्य कहने वाले और आप पर जुल्म करने वाले हिन्दू हैं और काँग्रेस समूची हिन्दू लोगों से ही व्याप्त है। उन्हीं के साथ अस्पृश्य वर्ग अगर मिल जाए तो सोचो कि आपकी शिकायतें कैसे हल होंगी? काँग्रेस में शामिल हुए अस्पृश्य वर्ग के प्रतिनिधि पदासीन कांग्रेस मंत्रीमंडल से किसी भी शिकायत के बारे में पक्ष के अनुशासन के तहत विधिमंडल में सवाल नहीं पूछ सकते। उन शिकायतों के बारे में हल्ला मचाकर उन शिकायतों का निवारण करने के लिए मंत्रीमंडल को मजबूर करना तो दूर की बात हुई। दूसरा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि आप पर जुल्म करने वाले हिन्दू यानी काँग्रेस पर अगर आपका इतना भरोसा है तो आपको अपने अलग अस्तित्व की जरूरत ही क्या है? कल को कोई आपसे यह सवाल भी पूछ सकता है कि आपको विशेष राजनीतिक अधिकारों की आवश्यकता ही क्यों है? सो, अस्पृश्य वर्ग का अगर कहीं हित है तो वह अलग रह कर अस्पृश्यों के दावों को समय-समय पर वाचा देने में है, न कि काँग्रेस में एकाकार हो जाने में। इसके बगैर अस्पृश्य वर्ग को इन अत्याचारों से मुक्ति नहीं मिलेगी। उसकी उन्नति नहीं होगी। एक बार फिर आदि-द्रविड़ संघ को धन्यवाद देते हुए डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपना भाशण पूरा किया। उसके बाद मद्रास के अस्पृश्यों के एक नेता श्री दिब श्रीनिवासन का भाषण हुआ।

मेघवाल वेठिया

युरोपियन वैश्य

रशियन सिक्ख

रामोशी शूद्र

लिंगायत हरिजन

लुहार हिन्दू

वाणी क्षत्रिय