111 20.11.1937 नेताओं की मृत्यु के बाद भी समाज कार्य चिरकाल तक निरंतर चलता रहे - माटुंगा (मुंबई) - Page 78

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जो वर्णन किया है उसमें सांप-नेवले में मित्रता होती है, चूहा बिल्ली का दूध पी रहा है, सिंह और हाथी भाई-भाई की तरह रहते थे आदि वर्णन है। वास्तव में दुनिया में हकीकत में इन बातों पर कहां तक भरोसा किया जा सकता है? काँग्रेस के साथ यही बात है। समाज की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि उसके प्रमुख नेता अगर गुजर भी जाते हैं तो भी सामाजिक कार्य निरंतर चलते रहना चाहिए। इस तरह की कार्ययोजना हो तभी वह पक्ष या वह समाज दुनिया में वैभवशाली बनेगा।

डॉ. बाबासाहेब का भाषण पूरा होने के बाद उन्हें और श्री भाऊराव को कई संस्थाओं की ओर से फूलमालाएं अर्पण की गई। इस अवसर पर प्रि. दोंदे, राउ आर. डी. कवली, मैंचेस्टर मिल के मैनेजर हेमीसाहब, कास्टीलसाहब, द. वि. प्रधान, भा. र. कडेकर, देवराव नाईक, वडवलकर, कमलाकांत चित्रे, उपशाम मास्टर, श्री मडकेबुवा, निले, गायकवाड, रामजी बोरीकर, श्री कोतवाल, आरोलकर आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे। धन्यवाद अर्पण के बाद मनोरंजन के विभिन्न कार्यक्रम पेश किए गए। और उसके बाद सभा समाप्त हुई।