58 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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* जातिभेद के कारण ही अस्पृश्य समाज में एका नहीं है
गुरवार 30 दिसम्बर, 1937 के दिन रात 10 बजे मद्रास मेल से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर बोरीबंदर स्टेशन से सोलापुर जिले के दौरे पर निकले। नासिक के विधायक भाऊराव गायकवाड और श्री कमलाकांत चित्रे भी उनके साथ थे। रास्ते में, दादर स्टेशन पर परिषद में उपस्थित रहने के लिए नासिक से आए रामा पाल आदि लोग (भंगी समाज के नेता) उनसे आकर मिले। दादर स्टेशन पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलमालाएं अर्पण की गईं। आगे पुणे स्टेशन पर सातारा के विधायक श्रीखंडेराव सावंत गाड़ी में आकर बैठे। दौंड स्टेशन पर विधायक श्री प्रभाकर रोहम और नगर के अन्य लोग दौरे में शामिल हुए।
सोलापुर जिला परिषद पंढरपुर में होनी थी। परिषद में हिस्सा लेने के लिए डॉ. बाबासाहेब तथा उनके साथ आने वाले अन्य लोग शुक्रवार दिनांक 31 दिसम्बर, 1937 के तड़के साढ़े पांच बजे के करीब कुर्डुवाड़ी स्टेशन में दाखिल हुए थे। स्टेशन पर परिषद के स्वागतध्यक्ष विधायक श्री जीवाप्पा ऐदाले डॉ. बाबासाहेब के स्वागत के लिए उपस्थित थे। उन्होंने तथा वहां उपस्थित अन्य लोगों ने डॉ. बाबासाहेब का प्रेमपूर्वक स्वागत कर उन्हें फूलमालाएं अर्पण कीं।
कुर्डुवाड़ी स्टेशन का प्लेटफार्म लोगों से उमड़ पड़ा था। इस स्टेशन के रेल अधिकारियों का बर्ताव लेकिन, गुस्सा दिलाने वाला था। दुख के साथ कहना पड़ेगा कि गरीब जनता का उत्साह और डॉ. बाबासाहेब की लोकप्रियता में दिनोंदिन आती बढ़ोत्तरी उनसे बर्दास्त नहीं हो रही थी। डॉक्टर साहब के दर्शन करने आए उत्साह के मारे लोग बिना टिकट प्लेटफार्म पर आ गए थे। उन सभी से उन्होंने दौंड स्टेशन से बनने वाले टिकट का दुगुना पैसा मांगा था, लेकिन वहां इक्ट्ठा हुए निर्धन लोग इतना पैसा कहां से लाएं? आखिर स्टेशन मास्टर की मध्यस्थता से यह मसला जैसे-तैसे ठंडा हुआ। और वहां अटके पड़े लोगों की छुट्टी हुई।
यहां जानबूझ कर इस प्रसंग का जिक्र छेड़ने के पीछे जो कारण है उसे हमारे अन्य लोगों को भी ध्यान में रखना है। अस्पृश्यों का आन्दोलन साधारणतः बहुजन समाज की आंखों में चुभता रहता है। इसीलिए किसी से भी, किसी भी तरह की छोटी-सी सहायता तक मिलने की उम्मीद बिना रखे उन्हें बरतना होगा। वरना अपमानकारी घटनाएं होंगी।
कुर्डुवाड़ी में डॉक्टर साहब के लिए स्पेशल गाड़ी की व्यवस्था की गई थी। अन्य मेहमान और स्वयंसेवकों के लिए एक स्पेशल बस रखी गई थी। ये दोनों गाडि़यां पौ
* जनताः 8 जनवरी, 1938, 1937