112 31.12.1937 जातिभेद के कारण ही अस्पृश्य समाज में एका नहीं है - कर्कम (सोलापुर) - Page 81

60 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

के कड़वे फल और उनका बुरा असर हमें भुगतना पड़ रहा है। दुर्भाग्य की बात यह है कि हिन्दु लोग हमारा जाति भेद तो दूर करते ही नहीं हैं, उल्टे अस्पृश्यों के अज्ञान का फायदा लेते हुए उनके जाति भेदों का पक्का बनाने की कोशिशों में लगे रहते हैं। मातंगों को महारों के खिलाफ भड़काते हैं। हममें अपनी भेदनीति फैलाना और हमारे बीच एका होने नहीं देना आदि वे करते हैं। जाति भेद फैलाने की जिम्मेदारी की जड़ भले हिन्दू धर्म में हो, हमें अपनी जिम्मेदारी नहीं भूलनी चाहिए। हम अगर अपनी जिम्मेदारी भुलाते हैं तो वह हमारे लिए आत्मघातक सिद्ध होगा। हमारा कर्त्तव्य है कि हम आपसी जाति-भेदों को नष्ट करें और हमारे बीच भेद-नीति को फैलने ना दें। हम जब तक इस लक्ष्य को साध्य नहीं कर लेते तब तक हमारा भाग्योदय संभव नहीं हो सकता। महार और मांगों के बीच की रोटी बंदी, बेटी बंदीखत्म होनी चाहिए। हर जाति अगर अपने बारे में शेखी बघारने के लिए केवल अपनी जाति से ही चिपकी रहेगी तो महार, महार ही रहेगा और मातंग, मातंग ही रहेगा और हम पर होने वाले अत्याचार का हम विरोध नहीं कर पाएंगे। महार या मांग नाम में ऐसा क्या रखा है जिसके बारे में गर्व महसूस किया जाए। इन नामों से कौन-सी उज्ज्वल परंपरा आपके सामने साकार होती है जिसे बनाए रखने के लिए आप जी-जान लगा दें? पूरा समाज इन नामों को तुच्छ मानता है। कूड़ेदान के कचरे जितनी भी आपकी कीमत नहीं है। सो, इस नाम के बारे में मन में अभिमान ना रखते हुए, यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि दोनों समाज एक ही सिल पर पिस रहे हैं। इसीलिए दोनों को मिल-जुल कर साथ में रहना चाहिए। इस बारे में अगर महार समाज के बारे में बताना हो तो वे कोई जाति-भेद मानने के लिए तैयार नहीं हैं। मांग, चमार या भंगी लोगों के साथ रोटी या बेटी व्यवहार करने के लिए वे तैयार हैं। और अगर ये व्यवहार करने में महार हिचकिचा रहे हों तो उनसे ये बातें करवाने का जिम्मा मैं लेता हूं।

दूसरी बात जो मैं आपको बताना चाहता हूं वह यह है कि फिलहाल आपको काँग्रेस नामक, संस्था से दूर ही रहना होगा। इसके पीछे एक ही वजह है। वह यह कि काँग्रेस मायावी सृष्टि है। आप मुझे एक बात बताइए कि गांव का बनिया या साहूकार अपने सिर पर अगर चार आने की गांधी टोपी पहनेगा तो क्या उनकी सोच बदल जाएगी? अपने गरीब ग्राहकों से ब्याज उगाहे बगैर क्या वह रह पाएगा? आपकी गर्दन पर सवार होना वह छोड़ कैसे देगा? और आज काँग्रेस बता रही है कि वे बनियों का हित साधेगी। साहूकारों का भला करेगी। साथ में वह गरीबों की भी हितसाधना करेगी। बिल्ली और चूहे को वह एक जगह कैसे रखना चाहती है। बिल्ली के सामने चूहे को रख कर वे चूहे की जान कैसे बचाएंगे? यह सब आपको भी सोचना चाहिए। इसीलिए हमें अपनी ताकत बढ़ानी पड़ेगी। और ताकत बढ़ाना यानी आपही के हित के लिए बनी स्वतंत्र लेबर पार्टी का सदस्य बनना। आज मैं आपसे बस इतना ही कहना चाहता हूं। इसके बाद डॉक्टरसाहब तथा अन्यों को फूलमालाएं और गुलदस्ते अर्पण किए गए चायपान के बाद सब पंढरपुर की तरफ आगे चले।