113 31.12.1937 जुल्म ढाने वालों का मुकाबला करने के लिए तैयार रहें - पंढरपुर - Page 83

62 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

दूसरे रास्ते से निकाला गया। लोगों से सभास्थल पहुंचने के लिए कहा गया। बाबासाहेब डाकबंगले पर पहुंचे जहां उन्हें रुकना था। वहां भी कुछ लोग पहले से आकर बैठे हुए थे। बाबासाहेब के वहां पहुंचने के बाद और लोग आने लगे। कई लोग गांव वालों से दी जाने वाली परेशानियां बाबासाहेब को बता रहे थे। साहब के दर्शन कर, उनसे विदा लेते थे।खानाखाने के बाद दोपहर 3 बजे के आसपास सोलापुर जिला अस्पृश्य राजनीतिक परिषद में उपस्थित रहने के लिए डॉक्टर साहब अपने साथ के लोगों के साथ निकले। डॉक्टरसाहब से मिलने के लिए पंढरपुर म्युनिसिपल्लिटी के अध्यक्ष रा. ब. परिचारक आए थे। वह भी परिषद में उपस्थित रहने के लिए निकले। म्युनिसिपल सराय में परिषद होनी थी। वहां बाबासाहेब का आगमन हुआ तो वहां जुटे बड़े जनसमुदाय ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ और जयध्वनि के साथ उनका भरपुर स्वागत किया। तुरंत सभा के कामकाज की शुरूआत हुई।

पहले लड़कियों ने सुस्वर गायन किया।

उसके बाद स्वागतध्यक्ष में जीवाप्पा ऐदाले एमलए का भाषण हुआ। डॉ. बाबासाहेब से परिषद की अध्यक्षता स्वीकारने की विनती की गई। सूचना का समर्थन किए जाने के बाद बाबासाहेब ने अध्यक्ष स्थान स्वीकारा। इस अवसर पर उन्होंने जो भाषण दिया वह इस प्रकार था -

असल में परिषद का अध्यक्षीय भाषण लिख कर लाना चाहिए था ताकि पढ़ कर आपको सुनाया जा सके लेकिन समयाभाव के कारण मैं ऐसा नहीं कर पाया। इसके लिए मैं क्षमाप्रार्थी हूं। सो, आज मैं बेकार में लंबा-चौड़ा भाषण नहीं देने वाला हूं। आज मैं मुख्यतः तीन विषयों पर बोलूंगा। (1) क्या हमें कभी हिन्दू समाज में समानता का दर्जा मिलेगा? (2) अपनी आर्थिक स्थितियों के बारे में यह सोचना है कि हमें संपत्ति का सही हिस्सा मिला है ? (3), आत्मोन्नति के लिए आंदोलन करने पर हम पर जुल्म ढाए जाते हैं, उनका प्रतिकार करने के लिए हम कैसे समर्थ बनेंगे?

हमने पहले सवाल पर पूरी तरह सोचा है और इसी सवाल के साथ धर्मांतरण का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। मैं इस बारे में आज यहां विस्तार से नहीं बोलना चाहता। लेकिन आपको इस पंढरपुर में चोखोबा सेखासतौर पर परिचित कराना है। मंगलवेढा में ‘कूस’ यानी गांव के लिए परकोटा बनाना था। इस काम के लिए पंढरपुर के महारों को बेगार पर रखा था। उनमें चोखोबा भी थे। काम चल ही रहा था। कि एक जगह दीवार गिर गई। उसके नीचे दब कर जो लोग मरे उनमें चोखोबा भी थे। बाद में चोखोबा की समाधि बनानी थी तो लोगों को चोखोबा की हड्डियां चाहिए थीं। वहां कई महार मरे थे इसलिए कई लोगों की हड्डियां वहां दबी थीं। उनमें से चोखोबा की हड्डियां कौन-सी हैं इसका