114 1.1.1938 राजनीति की गाड़ी खींचते हुए ध्यान रखें कि उसका पहिया आपको कुचल न दे - सोलापुर - Page 88

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को सरकारी वजीफे मिल रहे हैं। हमारे बच्चों कीखातिर सरकार ने बो²डगखोले हैं। लेकिन ईसाई लोगों के लिए यह सब उपलब्ध नहीं है। किसी अस्पृश्य बच्चे को वह जब तक अस्पृश्य है तब तक सरकारी स्कॉलरशिप मिलती है। लेकिन वह अगर ईसाई बनता है तो उसका वजीफा बंद हो जाता है। यानी, धर्मांतरण के साथ उसकी दरद्रिता

खत्म नहीं होती। धर्मांतरण के कारण उसे इस आर्थिक हानि को झेलना पड़ता है। आपका राजनीति में दखल होता तो हालात विपरीत होते। आपका समाज पढ़ा-लिखा है। आपके समाज में सैंकड़ों लड़के-लड़कियां मैट्रिक पास कर चुके हैं। उन्होंने कभी सार्वजनिक अन्याय के खिलाफ अनपढ़ अस्पृश्यों की तरह आंदोलन नहीं किया है। कोई लड़की जब नर्स बनती है तब अपने ही व्यवसाय में बंधी रह जाती है अपने तक ही उसकी सोच सीमित होकर रह जाती है। कोई मास्टर बनता है तब अपनी मास्टरकी में डूबा रहता है। सार्वजनिक कामों का कोई रुख नहीं करता। कोई बाबू बने या कुछ और हर कोई अपने ही काम में डूबा रहता है। सामाजिक अन्याय की वह अनदेखी करते हैं। सही है कि आपका समाज पढ़ा-लिखा है लेकिन उनमें से कितने लोग डिस्ट्रीक्ट जज, मैजिस्ट्रेट भी हैं? मैं इसकी वजह बताता हूं, ऐसा इसलिए है क्योंकि आपकी राजनीति की ओर अनदेखी हुई है। आपके हित के लिए बातचीत करने वाला, झगड़ने वाला कोई सरकार में नहीं है। राजनीति का छकड़ाखींचने के लिए आप में अगर कोई हो तब, भले अपनी इच्छानुसार वह चलता न हो, उसका पहिया अपने ऊपर से ना गुजरे इसका ध्यान तो रखा ही जा सकता है। आप अपने मुकाम पर पहुंच चुके हैं, अभी राह में हैं। चल रहे हैं। आपके मुकाम की अच्छाई-बुराई को देखने के बाद ही हम अपने मुकाम के रूप में आपका मुकाम अपनाएंगे।