115 10.1.1938 क्या कभी सांप-नेवला, चूहा-बिल्ली के बीच दोस्ती हो सकती है? - मुंबई - Page 89

68 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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* क्या कभी सांप-नेवला, चूहा-बि८ी के बीच दोस्ती हो सकती है?

सोमवार दिनांक 10 जनवरी, 1938 को मुम्बई प्रांतीय एसेंब्ली की बैठक मुम्बई काउंसिल हॉल में शुरू हुई। कोकण, सातारा, नासिक आदि जिले के किसान भाइयों ने पहले से घोषणा कर रखी थी कि वे इस बैठक के दौरान एसेंब्ली हॉल पर जुलूस ले जाएंगे। जुलूस संगठित और योग्य तरीके से निकले और सफल हो इसलिए स्वतंत्र लेबर पार्टी और अन्य किसान संस्थाओं के सहयोग से एक मोर्चा कमेटी चुन कर उसके नेतृत्व में किसानों का यह अपूर्व जुलूस काउंसिल तक ले जाना तय हुआ था। उसी के अनुसार 10 तारीख को उपर्युक्त सभी जगहों से सभी किसान अपने जुलूस लेकर दोपहर डेढ बजे आजाद मैदान पर इक्ट्ठा हुए थे। कोकण से आए किसान बंधु बिक्टोरिया डॉक से सीधे बेरीबंदर के सामने वाले मैदान में इक्ट्ठा हुए थे। अन्य किसानों के समूह परेल के कामगार मैदान पर जुटे और बड़े जुलूस में आजाद मैदान पहुंचे। जुलूस में जगह-जगह ‘जमींदार पद्धतिखत्म करो’, ’सावकारशाही को नष्ट करो’, ‘किसानों की जय हो’ आदि पंक्तियों लिखी हुई पताकाएं लहरा रही थीं। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की भी जय बोली जा रही थी। इस प्रकार के तामझाम वाला जुलूस कालबादेवी मार्ग से आ रहा था जिसे देख कर वहां के व्यापारियों को दहशत-सी हुई। काँग्रेस जैसी अधिकारारूढ़ सत्ता के खिलाफ किसानों का यह संगठित विद्रोह देख कर उन्हें डर और आश्चार्य अगर महसूस हुआ हो तो उसमें असामान्य कुछ भी नहीं था। यह जुलूस जैसे ही आजाद मैदान पर आया तब तक चौपाटी की राह में मुम्बई के ‘बालू’ लोगों का तीसरा जुलूस किसानों के इस जलूस में आ शामिल हुआ। इसके अलावा ठाणे-कल्याण आदि जगहों के किसान विभिन्न मार्गों से आजाद मैदान पर आ रहे थे। ठाणे जिले के किसान बंधु डॉ. भोईर के नेतृत्व में सुबह ही दादर से कामगार मैदान पर उपस्थित हुए थे। इस प्रकार जमावड़ा बढ़ता रहा और धीरे-धीरे आजाद मैदान पर जुलूस के लिए इक्ट्ठा किसानों की संख्या बीस से पच्चीस हजार तक पहुंची। इस महाप्रचंड जुलूस में व्यवस्था कायम करने के लिए भाई चित्रे, यालिक, परलेकर, पोतबीस, प्रधान, मिरजकर, तालजी पेंडसे, सुरबा टिपणीस, मडकेबुवा जाधव, राजाराम भोले, डॉ. भाईर आदि लोग वहां हाजिर हुए थे। उन्होंने वहां इक्ट्ठा हुए किसानों को आज के किसानों के जुलूस के बारे में सविस्तार जानकारी दी। तभी वहां ए डिवीजन के पुलिस इंसपेक्टर जुलूस किस राह से और कैसे ले जाया जाए इस बारे में पुलिस कमिशनर का हुक्म लेकर आए। जुलूस को काउंसिल

* जनताः 15 जनवरी, 1938