115 10.1.1938 क्या कभी सांप-नेवला, चूहा-बिल्ली के बीच दोस्ती हो सकती है? - मुंबई - Page 91

70 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कोई स्थान नहीं मिलना चाहिए। आज भी जातियों के मेहनतकश वर्गों का यह संगठन देख कर मुझे आनंद हो रहा है। इसीलिए आज के दिन को मैं सोभाग्य का दिन मानता हूं। क्योंकि आज हमारा यह संगठन केवल स्वार्थ त्याग के बल पर ही खड़ा है। इसीलिए मेहनतकश वर्ग को अमीर वर्ग के पक्ष यानी काँग्रेस जैसे पक्ष के साथ सहयोग कर या उन पर विश्वास कर चलेगा। नहीं आप जानते ही हैं कि इस दुनिया में जिसका घर जलता है और जो उसके घर में आग लगाता है, उन दोनों में क्या कभी एक राय या मनोमिलन हो सकता है? प्राणियों को ही देखिए, क्या सांप और नेवला कभी एक हो सकते हैं? चूहे-बिल्ली में क्या कभी दोस्ती हो सकती है? इस प्रकार प्रकृति के खिलाफ सृष्टि बनाने वाले का आप क्या कभी भरोसा कर सकते हैं? अमीरों की शरणगाह काँग्रेस की ओर भी हमें इसी नजरिए से देखना चाहिए।

मुम्बई एसेंब्ली के कांग्रेस सदस्यों को देखिए। काँग्रेस की टिकट पर चुनाव जीत कर आए सभी सदस्य साहुकार, जमींदार, जागीरदार और अमीर लोग हैं। अपने हित के खिलाफ वे काँग्रेस को कुछ करने ही नहीं देंगे। उनमें से हर एक 50,000 रु. से अधिक आय वाला है। ब्याज के सहारे अपना धन बटोरने वाले ये लोग मेहनतकश लोगों के कल्याण की बात कैसे कर सकते हैं? इस बात की आप पक्की गांठ लें कि काँग्रेस की कृपा से चुनकर आए ये सदस्य आपके हित की कोई बात नहीं करेंगे। 1937 में आप लोगों ने जब इन्हें चुना तब ये किस प्रकार आपके पैर छू रहे थे उसे याद कीजिए। हम सबसे पहले आपके हित का ख्याल रखेंगे। आपके हित के लिए काँग्रेस ने फकीरी अपनाई है इसलिए काँग्रेस को ही मत दीजिए कहने वाले काँग्रेस के ये नेता आपकी तरफ अब देखेंगे तक नहीं। इसीलिए मैं आपसे कहता हूं कि इन मधुरभाषी लोगों को आगे से बिल्कुल घास न डालें न उनकी परवाह करें। ऐसे धोखेबाज लोगों की असली पूजा पैर की ठोकर लगाकर की जानी चाहिए। आगे से अपना सच्चा हितकारी कौन होगा यह तय करते समय पूरी सावधानी बरतें। आपके पास अपनी बुद्धि है सो अपनी बुद्धि के बल पर अच्छे-बुरे के बारे में सोचकर तय करें कि अपना असली हितैषी कौन है? कौन-सा पक्ष प्राणों की परवाह किए बिना आपके लिए लड़ने के लिए तैयार है इसका फैसला खुद सोचकर करें।

सच पूछो तो दुनिया में केवल दो ही जातियां हैं - अमीर और गरीब, इनके अलावा तीसरा वर्ग है मध्यवर्गीयों का। दुनिया के किसी भी उज्ज्वल आंदोलन के विनाश के लिए यही वर्ग जिम्मेदार होता हैं। कल्पना कीजिए, मेहनत कर अपना पेट पालने वाले लोग हमारे देश में 80 प्रतिशत तक है। सोचिए कि इस आंकड़े की तुलना में अन्य वर्गों का अनुपात कितना कम है। लेकिन केवल अज्ञान के कारण और वरिष्ठ कहलाने वालों के हाथ में सत्ता होने के कारण आप हम जैसी बहुसंख्यक जनता को वे शह दे सकते