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हैं। लेकिन अगर आप सभी लोग जागरूक रहेंगे संघ शक्ति ओर आत्मनिर्भरता के साथ किस बात में अपना हित है इसका अगर आपको पता चले तो आप पलक झपकते सभी अधिकार अपने हाथ में ले सकते हैं। राष्ट्रीय काँग्रेस के सविनय अवला आंदोलन का आप अगर सूक्षमता से निरीक्षण करेंगे तो आपको पता चलेगा कि मेहनत करने वाले लोगों की मदद से ही काँग्रेस इतने प्रभावी ढंग से अपनी लड़ाई लड़ सकी। इन मेहनतकश लोगों को काँग्रेस के सत्ताधारियों ने उस समय बहुत सारे आशा भरे वचन दिए थे। उन्होंने कहा था कि काँग्रेस के हाथ में जब सत्ता आएगी तब काँग्रेस सबसे पहले गरीब, मेहनतकश लोगों के हितों की रक्षा के मसले पर काम करेगी। लेकिन आप आज क्या देख रहें? आज कांग्रेस के हाथ में सत्ता है लेकिन वह कोई काम अपनत्व के साथ या फौरन नहीं करती। आज मुम्बई एसेंब्ली में उनके उम्मीदवारों की संख्या अधिक है। बहुमत के बल पर आपके हित में कोई भी कानून बनाना उनके लिए असंभव नहीं है। हमारी स्वतंत्र लेबर पार्टी के केवल 145 सदस्य हैं। इतने कम सदस्यों के सहारे आपके हित में कानून बनाना हमारे लिए असंभव है। इसलिए आज के बाद ध्यान रखें कि काँग्रेस के पूंजीपतियों को अपने वोट देकर चुनाव ना जिताएं। आज जिस प्रकार आप संगठित होकर यहां आए हैं उसी प्रकार जाति भेद, धर्म भेद भुला कर अपने संगठन को मजबूत बनाइए।
कोंकण के बारे में सोचें तो वहां जमींदार-साहूकारों की संख्या केवल हजार-दो हजार तक होगी, और हाड-तोड़ मेहनत करने वाले आपके जैसे लोग 13 लाख से अधिक हैं। ऐसे जब हाल हैं तब भी हम इतने दुर्बल क्यों हैं? इस पर मुझे बड़ा आश्चर्य महसूस होता है। आज हजार-दो हजार लोग हम जैसे 13 लाख लोगों पर अपनी हुकूमत चला रहे हैं। इसका मूल कारण है हमारी गरीबी। मुट्ठी भर अमीरों से आप निचोड़े गए हैं, जा रहे हैं निचुड़ी हालत में आपके अंदर प्रतिकार करने की ताकत ही नहीं बची है। इसीलिए, जिन्होंने आपको आपकी इस असहनीय और असहाय हालत तक पहुंचाया उन
खोत, साहूकार, जमींदार आदि की किसी तरह से कोई सहायता न करें। यह बात भी ध्यान में रखें कि काँग्रेस कभी भी इन धनवानों को दुख पहुंचाकर आपका हित कभी नहीं करेगी। इसी प्रकार आज यहां जुटे विभिन्न जातियों के लोग अपनी-अपनी जाति के संगठन बनाकर अलग-अलग अपना कार्य किया करते थे। इसलिए मेहनतकशों का संगठन नहीं बन पाया था। लेकिन अब ऐसा संगठन बनने का भाग्य दिखाई दे रहा है, यह बड़ी खुशी की बात है।
अमीर वर्ग की सहायता करने वाली काँग्रेस की किसी प्रकार सहायता कर अपना हित नहीं होगा। आज के हालात यही बता रहे हैं। पिछले एसेंब्ली चुनावों में जिस तरह हमने स्वतंत्र लेबर पार्टी की ओर से काँग्रेस के खिलाफ लड़ कर कुछेक सीटें हासिल कीं उसी प्रकार अगर कम्युनिस्ट आदि उग्रवादी पक्षों के नेता भी काँग्रेस के खिलाफ