72 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चुनाव लड़ते तो उन्हें भी दो-चार सीटें मिलती और आखिर एसेंब्ली में हमारी कुल संख्या बढ़ने के कारण हमारी मदद ही होती। जो हो, कम से कम आगे उन्हें अपने कर्त्तव्य को निभाने में कोताही नहीं बरतनी चाहिए। साथ ही, इस मौके पर अपने कम्युनिस्ट मित्रों से दो शब्द उनके हित के लिए सुनाना गलत नहीं होगा। कम्युनिस्ट दर्शन की किताबें यहां उपस्थित सभी कम्युनिस्ट नेताओं की तुलना में मैंने काफी अधिक पढ़ी है। उन किताबों को पढ़ कर मुझे लगा कि इनमें जो दर्शन बताया गया है वह भले कितना भी अच्छा क्यों न हो, उसका कहां तक इस्तेमाल किया जा सकता है यह हमें देखना होगा। और अगर सोच-समझ कर उस दर्शन को लागू किया जाए तो मुझे लगता है कि रूसी लोगों को उसे लागू करने में जितना समय लगा था उससे कम समय में हिन्दुस्तान में लागू किया जा सकता है क्योंकि हिन्दुस्तान में स्थितियां उसके अनुकूल हैं। इसीलिए मुझे साम्यवादी दर्शन हमेशा मेहनतकश वर्ग की आंदोलन स्वरूप लड़ाई से काफी मिलता हुआ और करीब लगता आया है। आज हमारा ऐसा हाल है कि हमारे पास धन नहीं है। हमारे आंदोलन का प्रचार-प्रसार करने के लिए कोई प्रभावी दैनिक अखबार नहीं है। सरकारी सहायता मिलने की आशा नहीं है। इसीलिए आप अपना अलग संगठन बनाएं। सभी आपसी मतभेदों को भुलाकर अपनी लड़ाई लड़ने के लिए धैर्य के साथ तैयार हो जाइए।
मुंबई सरकार से की गई मांगें
मूलभूत मांगें
- किसान आजाद, सुखी और संतुष्ट रह पाए इसलिए खेती करने वाले को ही
उसकी मेहनत का फल मिलना चाहिए।
- खेती पर ही जिंदगी बसर करने वालों को साथ अगर न्याय करना हो तो तथा
उनका आर्थिक हित साधना हो तो जमींदार और जागीदारों जैसे बिचौलिए ना
हों।
- जमीन पर या किसान पर किसी तरह का लगान या भूमि कर लागू करने से
पहले उसके चरितार्थ का योग्य प्रबंध करना सरकार अपना कर्त्तव्य माने।
- साथ ही, किसानों को न्यूनतम मजदूरी दिलाने का कानूनन प्रबंध कर उनके
हितों की रक्षा करना भी लोकमतवादी सरकार का कर्त्तव्य है।
अविलंब मांगें
- जिस प्रकार अदा न किया गया लगान और बाकी देनदारियां माफ कर दी गईं
उसी प्रकार अब तक अदा न की गई जमीन की देनदारियों को भी तुरंत माफ
कर दिया जाए।
- जमीन का न्यूनतम उत्पादन तय कर उससे कम उत्पादन होने पर पूरा भूमि कर