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माफ किया जाए। साथ ही न्यूनतम उत्पादन से बढ़ कर जहां उत्पादन हो उस
जमीन पर बढ़त के अनुपात में भूमि कर लागू करने के हिसाब से जमीन के
राजस्व कानून में सुधार किया जाना चाहिए। साथ ही, बाजार में कीमतें कम
होने के कारण ये सुधार लागू होने तक सालाना जिन्हें 75 रु. से कम भूमि-कर
देना पड़ता है उनका भूमि-कर तुरंत 50 प्रतिशत कम कर देना चाहिए। 3. जमींदार और जागीरदार व्यवस्था आर्थिक रूप से नुकसानदेह तथा सामाजिक
रूप से जुल्मी होने के कारण ये व्यवस्थाएं प्रतिपूर्ति के साथ या बिना प्रतिपूर्ति
के नष्ट करने के लिए कानून बनाने का त्वरित प्रबंध किया जाए। 4. ( i ) लगातार तीन सालों तक जो जमीन जोते, जमीन उसकी मानी जाए। यह
कानून जमींदार की सभी रैयत पर लागू किया जाना चाहिए। इस कानून से कोई
बचाव के उपाय ना कर पाएं इसके लिए एक जमीन आयोग (लैंड कमीशन)
की नियुक्ति हो और इस कमीशन की इजाजत के बिना रैयत को दी गई जमीन
उससे छीनी ना जाए। रैयत जब तक लाभ अदा कर रहा है तब तक तीन सालों
तक किसी भी कारण से छीनी ना जाए।
( ii ) भूमि-कर के अनुपात में तीसरा हिस्सा अधिक इजारा लिया जाए। उससे
अधिक इजारा रैयत से ना किया जाए।
- छोटे किसानों द्वारा लिया जाने वाला पानी का लगान 50 प्रतिशत कम किया
जाना चाहिए। सिंचाई विभाग द्वारा अधिकतर छोटे किसानों और रैयत के लिए
फायदेमंद साबित होने के नजरिए से सिंचाई कानून में सुधार लाना चाहिए। 6. सभी गांवों में मवेशियों को मुफत चराने के लिए वन क्षेत्र उपलब्ध हो। 7. कर्ज हटाने का सुयोग्य कानून सब जगह लागू होने तक कर्ज को स्थगित किया
जाए।
- जमीन किसानों के हाथ से निकल कर साहूकारों के हाथ ना चली जाए इसीलिए
साहूकारी पर बंधन डाले जाएं, शर्तें तय की जाएं।
- किसानों के निर्वाह के लिए जरूरी न्यूनतम जमीन और उनके गुजारे के लिए
जरूरी चीजों पर साहूकार से कुर्की लाने पर पाबंदी लगाई जाए। 10. सभी व्यस्क महिलाओं और पुरुषों को मतदान का अधिकार मिले। 11. बेगार में काम करना और गैर-कानूनी ढंग से पैसों की उगाही को फौजदारी
अपराध माना जाए।
- भू-राजस्व विभाग के सभी मैजिस्ट्रेटी अधिकार निरस्त किए जाएं।
- खेती योग्य सभी परती जमीन भूमिहीन किसान-मजदूरों को मुफत में दी जाए।