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तो असंभव श्रेणी की बात होगी। फिर, केवल संयुक्त चुनाव क्षेत्र से इन दो समाजों में एकता कैसे होगी? इनमें एकता लानी हो तो आज लागू सारे सामाजिक बंधनों को झट से तोड़ना होगा। और इसके लिए सबसे पहले हिन्दु समाज को आगे आना होगा। केवल ऐसे बिलों में राष्ट्रभावनाएं जागृत करने की योजनाएं बना कर यह योजना सफल नहीं हो सकती। इस सर्वसाधारण सुधार बिल के संदर्भ में कहना हो तो इससे मेरी निराशा हो चुकी है। इस बिल में संतोषजनक बातें ढूंढना ‘दर्या में खसखस’ ढूंढने जैसा ही है।