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हिन्दुस्तान के इतिहास पर अगर एक नजर डाली जाए तो पता चलेगा कि अब तक कभी यहां प्रजातांत्रिक राज्य प्रणाली नहीं रही। कई ग्रंथों को पढ़ने के बाद मुझे जो जानकारी मिली है उससे साफ जाहिर होता है कि हिन्दु राष्ट्र का पतन और अवनति हिन्दुओं से मान्यताप्राप्त चातुर्वर्ण्य की वजह से ही हुआ है। चातुर्वर्ण्य की प्रथा को अस्तित्व में आए आज कई शतक बीत चुके हैं, इस कारण उसकी जड़ें हिन्दु संस्कृति में गहरे तक धंसी हैं और उसके बुरे परिणाम हिन्दुस्तान को भुगतने पड़े हैं। ब्राह्मण ही केवल विद्यार्जन और विद्यादान करेंगे, क्षत्रिय लड़ाई का काम करेंगे, वैश्य व्यापार-उद्यम करेंगे, शूद्र सेवा करेंगे ये चातुर्वर्ण्य पद्धति की सीख है। इस पद्धति के कारण हमारे राष्ट्र का कितना और कैसे नुकसान हुआ है यह अच्छे पढ़े-लिखे लोगों को भी अभी ठीक-ठीक समझ नहीं आता है। इस देश के बहुसंख्या वाले वर्ग को सीधे-सीधे हाशिये पर डाल दिया गया। राष्ट्र की आजादी के लिए पोषक बहुसंख्यकों का वर्ग बेकार साबित हुआ। हमारा देश हमेशा विदेशियों के शासन में रहा। कुछ दिन ही आजादी भोगी कि यूनान के एलेक्झांडर ने हिन्दुस्तान पर आक्रमण कर हिन्दुस्तान में अपना राज्य स्थापन किया। उसके बाद कुछ समय तक थोड़ी आजादी मिली और मराठों का राज स्थापन हुआ। पेशवाओं सभी कामकाज अपने हाथ में लिया ही था कि पूरे देश को अंग्रेजों ने गुलामी में ढकेल दिया। आज यहां उपस्थित सभी लोगों से मैं पूछता हूं कि इस देश को अच्छा भाग्य हमेशा के लिए क्यों नहीं मिला? अन्य देशों के इतिहास देखें तो वहां ऐसी स्थितियां दिखाई नहीं देती। इसकी वजह क्या है? इस बात के बारे में आप अगर बारीकी से सोचें तो पता चलेगा कि हिंदुओं के धर्मगुरुओं ने यानी ब्राह्मणों ने हिंदुस्तान पर जो चार्तुण्वर्ण पद्धति लादी थी उसके कारण यह अनर्थ हुआ है।
एक बात आप सब सहजता से मानेंगे कि अगर किसी गांव पर पठान हमला करे तो अगर गांव के सब लोग मुस्तैदी से उनका सामना कर उन्हें खदेड़ेंगे तो उन्हें भगाया जा सकता है। हाथ में तलवार हो तो लोग अपने ऊपर होने वाले हमले का सामना कर सकते हैं। लेकिन उसके बदले अगर गिने चुने चार लोग हाथ में तलवार लेकर खड़े होंगे, औरों को हंसिए तक को छूने नहीं देंगे तो, बिल्कुल मना करेंगे तो राष्ट्र की रक्षा कैसे की जा सकती है?
हिंदुस्तान पर अगर अलेक्जांडर या मुहम्मद बिन तुगलक हमला करे तब भी मुट्ठी भर क्षत्रियों के अलावा अन्य कोई भी लड़ने या राष्ट्र की रक्षा के लिए न जाए यह चातुर्वर्ण्य की सीख मुट्ठी भर ब्राह्मणों को अस्त्र देना नहीं, वैश्य शस्त्र धारण नहीं करेंगे, शूद्र शस्त्रों को हाथ नहीं लगाएंगे-ऐसी ही सीख के कारण हिंदुस्तान की अवनति और पतन हुआ है। जिसके पोहोचे में बल हो उसे शस्त्र धारण करने की इजाजत अगर होती तो इतना विपरीत असर नहीं होता। ‘धर्मगुरु बने इतराने वाले भटों-बाह्मणों ने ये सारी